sana sana hath jodi summary

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sana sana hath jodi summary?(http://hindibharti.in/wp-admin/post.php?post=1518&action=edit-साना साना हाथ जोड़ि)

NCERT CBSE Class-10 विषय-हिंदी-अ कृतिका-2


पाठ-साना साना हाथ जोड़ि…..मधु कांकरिया

पाठ का सार

पार्ट-1

‘साना साना हाथ जोड़ि…’- लेखिका मधु कांकरिया द्वारा लिखा एक ‘यात्रा-वृत्तांत’ है।

यात्रा-वृत्तांत-जब कोई लेखक अपने द्वारा की गई यात्रा का वर्णन अपनी भाषा-शैली में करता है, तो उसे यात्रा-वृत्तांत कहते हैं।

     इस यात्रा-वृत्तांत पाठ में लेखिका ने   सिक्किम राज्य की राजधानी और वहाँ के हिमालय की यात्रा की है। इसमें उन्होंने सिक्किम की प्रकृति की खूबसूरती और वहाँ के लोगों के साहस का सुंदर वर्णन किया है।

पाठ का सार कुछ इस प्रकार है- लेखिका अपनी सहेली मणि और ड्राइवर जितेन जो गाइड भी है। कुल तीन लोग सिक्किम की यात्रा के लिए निकलते हैं। लेखिका की यात्रा सिक्किम की राजधानी के गैंगटॉक शहर से शुरू होती है। जब लेखिका रात में इस शहर को देखती है। तब उसे ऐसा लगता है जैसे आसमान मान उल्टा पड़ा हो। क्योंकि रात में पूरा शहर रोशनी से जगमगाता हुआ दिखाई देता है। यह दृश्य उसे बहुत अच्छा लगता है। लेखिका गैंगटॉक को  मेहनतकश बादशाहों’ का शहर कहकर सम्मान देती है। यहाँ के लोग बहुत ही मेहनती होते हैं। यहाँ की सुबह, शाम और रात बहुत ही सुन्दर है।


पार्ट-2    sana sana hath jodi summary   

तारों भरी रात समाप्त हो जाती है। सुबह होने पर लेखिका एक नेपाली युवती द्वारा एक प्रार्थना सीखती है। साना साना हाथ जोड़ि….। छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो

     सुबह की प्रार्थना करने के बाद उसे यूमथांग जाना था। जाने से पहले वह हिमालय की तीसरी सबसे बड़ी चोटी कंचनजंघा को देखने बालकनी में जाती है। लेकिन बादल होने के कारण कंचनजंघा की चोटी दिखाई नहीं देती है। तभी सामने ही उसे कई तरह के रंग-बिरंगे फूल दिखाई देते हैं। उसे ऐसा लगाता है, जैसे वह फूलों के बाग़ में आ गई हो। उसके बाद लेखिका गैंगटॉक से 149 किलोमीटर दूर यूमथांग जाती है। यूमथांग गहरी घाटियों और फूलों की बादियों के लिए जाना जाता है। लेखिका जितेन से बच्चों की तरह उत्साहित होकर पूछती है- “क्या वहाँ बर्फ मिलेगी?

पार्ट-3

        तीनों वहाँ से निकल पड़ते हैं। रास्ते में उन्हें पाइन और धूपी के खूबसूरत नुकीले पेड़ देखने को मिलते हैं। पहाड़ी रास्तों से आगे बढ़ने पर लेखिका को एक जगह पर लाइन से सफ़ेद रंग की बौद्ध पताकाएँ(झंडियाँ) दिखाई देती हैं। ये पताकाएँ शांति और अहिंसा का प्रतीक हैं। जिन पर पर मंत्र लिखे हुए थे। जितेन नार्गे ने बताया कि जब बौद्ध धर्म में किसी की मृत्यु हो जाती है, तब उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर किसी पवित्र स्थान पर सफ़ेद रंग की 108 पताकाएँ फहरा दी जाती हैं। इन्हें हटाया नहीं जाता है। ये अपने आप नष्ट हो जाती हैं। नार्गे आगे यह भी बताता कि किसी शुभ या नए कार्य की शुरुआत करने पर सफ़ेद पताकाओं के स्थान पर रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं। नार्गे ने जीप में दलाई लामा की फोटो लगा रखी थी।

        जीप थोड़ी आगे बढ़ती है। जितेन बताता है- इस जगह का नाम  ‘कवी लोंग स्टॉक’ हैयहाँ गाइड फिल्म की शूटिंग हुई थी। यहीं पर लेपचा और भूटिया जातियों में संघर्ष हुआ था। जिसका एक पत्थर यहाँ स्मारक के रूप में लगा हुआ। उन्हीं रास्तों पर लेखिका ने एक कुटिया के भीतर घूमता चक्र देखा। पूछने पर, जितेन नार्गे कहता है यह धर्म चक्र(प्रेयर व्हील) है। इसको घुमाने से मनुष्य के सरे पाप धुल जाते हैं। सुनकर, लेखिका सोचती है। मैदान हो या पहाड़, विज्ञान की प्रगति के बाद भी इस देश की आत्मा एक जैसी है।

पार्ट-4  sana sana hath jodi summary

जैसे-जैसे लेखिका अपनी यात्रा में पहाड़ की ऊंचाई की तरफ बढ़ती है। स्वेटर बुनती नेपाली महिलाएँ और पीठ पर कार्टून रखे नेपाली बहादुर दिखाई देते हैं। अब लेखिका को हिमालय पल-पल बदलता हुआ नजर आ रहा था। देखते-देखते रास्ते संकरे और जलेबी की तरह घुमावदार होने लगते हैं। हिमालय बड़ा होने लगता है और घाटियाँ पाताल नापती नजर आती हैं। लेखिका जीप की खिड़की से सिर निकालती है। कभी आसमान को छूते पर्वतों के शिखरों को, तो कभी दूध की धारा की तरह गिरते झरनों को, कभी चाँदी की तरह चमकती तिस्ता नदी को देखती है। लेखिका प्रकृति की सुन्दरता को देखकर अंदर ही अंदर रोमांचित होती है।

     तभी उनकी जीप एक स्थान पर रुकती है। उनको एक झरना गिरता हुआ दिखाई देता है। उस झरने का नाम सेवेन सिस्टर्स वॉटरफॉल है। लेखिका पत्थर पर बैठकर झरने के संगीत के साथ आत्मा का संगीत सुनने लगती है। यहाँ पर उसे ऐसा लगता है जैसे उसके अन्दर की सारी बुराइयाँ इस झरने के साथ बह गईं हों। जैसे-जैसे लेखिका आगे बढ़ती है,  तो प्रकृति के कई और सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। उसे ऐसा लगता है जैसे कोई जादू की छड़ी घुमाकर सब कुछ बदल देता हो। लेखिका प्रकृति की इस माया और छाया को अपनी आँखों से देखती है।

पार्ट-5 

जीप थोड़ी देर के लिए रुकवा दी जाती है। लेखिका को चारो ओर पर्वत, झरने, फूलों, घाटियों और वादियों के दुर्लभ नजारे दिखाई देते हैं। उसको पहली बार अनुभव होता है कि जीवन का आनंद यही है।

     लेखिका को जीप में नींद आ जाती है। और जैसे ही गाड़ी रुकती है तो उसकी नींद खुल जाती है। वहाँ उसे सुंदर औरतें  पत्थर तोड़ती हुई दिखाई देती हैं। वे अपनी पीठ पर टोकरी बांधे हुए हैं। उन टोकरियों में बच्चे बंधे हुए हैं। वहाँ खड़ा एक व्यक्ति बताता है कि ये महिलाएँ पत्थरों को तोड़कर रास्ता बनाने का काम करती हैं। कभी-कभी काम करते हुए मजदूरों की मौत भी हो जाती है। इन मजदूरों को देखकर लेखिका को लगता है कि कितना कम लेकर, समाज को कितना अधिक वापस कर देते हैं।

     ऊँचाई पर चलने के बाद लेखिका ने एक जगह देखा कि सात-आठ साल के बच्चे स्कूल से घर लौटते समय लिफ्ट माँग रहे थे। जितेन ने बताया ये बच्चे रोज तीन-साढ़े तीन किलोमीटर पहाड़ की चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं। मणि पूछती है, क्या यहाँ स्कूल बस नहीं चलती है?

         जितेन ने बताया यहाँ स्कूल बसें नहीं चलती हैं। ये बच्चे स्कूल से आने के बाद घर के कामों में सहयोग करते हैं। जैसे पालतू पशुओं को चराना, जंगल से लकड़ियाँ लाना आदि।

 पार्ट-6 sana sana hath jodi summary

  जीप अब कम चौड़े रास्तों से होकर चल रही थी। खतरनाक रास्तों के कारण जगह-जगह लिखा था, ‘धीरे चलाएँ, घर में बच्चे आपका इंतजार कर रहे हैं। थोड़ा आगे बढ़ने पर काले-काले घने बालों वाले याक दिखाई देते हैं। सूरज डूबने लगता है तभी लेखिका को कुछ पहाड़ी औरतें गायों को चराकर वापस लौट रहीं थीं। फिर जीप चाय के बागानों से गुजरने लगती है। चाय के हरे-भरे बागानों में कई युवतियाँ बोकू (सिक्किमी परिधान) चाय की पत्तियाँ तोड़ रही थीं। वे गहरे लाल रंग का बोकू पहने थीं। चाय के बाग हरे थे। उनके बीच युवतियों के गुलाबी चेहरों पर सूरज की रोशनी पड़ रही थी। तब पूरा दृश्य इन्द्रधनुषी दिखाई पड़ रहा था। इस सुंदरता को देखकर लेखिका सहन नहीं कर पा रही थी।

     यूमथांग पहुँचाने के लिए लेखिका को रात में लायुंग में ठहरना पड़ा। गगनचुंबी पहाड़ों के तले एक छोटी सी शांत बस्ती लायुंग थी। भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर शांत और एकांत जगह। लेखिका आराम करने के लिए तिस्ता नदी के किनारे पत्थरों पर बैठ जाती है।    वहाँ बैठकर हिमालय, पहाड़, झरना, नदी और पेड़-पौधों को देखती है। इनको देखकर लेखिका के अंदर की सारी बुराइयाँ समाप्त हो जाती हैं।      रात होने पर सब एक लकड़ी के गेस्टहाउस में रुकते हैं। गेस्टहाउस में गाने बज रहे थे। जितेन अपने साथियों के साथ नाचना शुरू कर देता है। लेखिका भी अन्य यात्रियों के साथ गोला बनाकर नाचने लगती है। उसकी सहेली मणि भी बहुत ही सुन्दर नृत्य करती है। लेखिका देखकर चकित हो जाती है।

पार्ट-7     

  लायुंग में सुबह बहुत ही शांत रहता है। यहाँ के लोगों की जीविका का साधन पहाड़ी आलू, धन की खेती और शराब का व्यापार है। लेखिका लायुंग में बर्फ देखने के लिए बेचैन थी। लेकिन उसे यहाँ बर्फ नहीं दिखी। एक सिक्किमी युवक ने बताया कि प्रदूषण के कारण बर्फ गिरना कम हो गई है। उसने लेखिका से कहा, यदि आप कटाओ चले जाएँ, तो वहाँ पर जरुर बर्फ मिलेगी। कटाओ यानी भारत का स्विट्जरलैंड‘!  

     लेखिका लायुंग से कटाओ जाती है। लायुंग से कटाओ के लिए दो घंटे का सफर था। कटाओ के रास्ते में बादल-ही बादल थे। नार्गे जीप बादलों को चीरता हुआ चला रहा था। आधे घंटे के सफर के बाद बादल कम हो जाते हैं। नार्गे उत्साहित होकर कहता है कि “कटाओ हिंदुस्तान का स्विट्जरलैंड है।” लेखिका की सहेली मणि स्विट्जरलैंड घूमकर आई थी। वह तुरंत कहती है- स्विट्जरलैंड इतना सुंदर नहीं है।

पार्ट-8      sana sana hath jodi summary

लेखिका कटाओ पहुँच जाती है। कटाओ के पहाड़ बर्फ से ढके थे। चारो ओर साबुन के झाग की तरह ताजा बर्फ गिरी हुई थी। लेखिका जीप से सिर निकालकर देख रही थी। सभी जीप से उतरकर बर्फ पर  खेलने लगते हैं। कटाओ में घुटनों तक नरम-नरम बर्फ थी। सब ओर बर्फ ही बर्फ थी। सारे सैलानी बर्फ पर फोटो खिचाने में मस्त हो जाते हैं। लेखिका के पैर झन-झन करने लगते हैं। उसका मन वृन्दावन हो रहा था।

        वह बर्फ वाले जूते पहनकर मस्ती करना चाहती थी। लेकिन युमथांग झांगू की तरह टूरिस्ट-स्पॉट न होने के कारण उसे जूते नहीं मिले। यहाँ पर कोई दुकान भी नहीं थी। इस जगह को देखकर उसे ऐसा लगता है कि ऋषि-मुनियों ने वेदों की रचना यहीं से प्रेरणा पाकर की होगी। यहीं जीवन के मूल्यों को खोजा होगा। यहीं ‘सर्वे भवंतु सुखिना’ का महामंत्र प्राप्त किया होगा। आगे वह यह भी  सोचती है कि ऐसे सौंदर्य से प्रभावित होकर अपराधी का भी हृदय बदल जाएगा।

  पार्ट-9   (साना साना हाथ जोड़ि-प्रश्न-उत्तर ) जानने के लिए क्लिक करें 

उसी समय लेखिका को मिल्टन की कविताएँ याद आने लगती हैं। उसकी सहेली मणि हिम शिखरों को देख रही थी। वह दार्शिनकों की तरह कहती है, “ये हिमशिखर जल स्तंभ हैं, पूरे एशिया के। देखों, प्रकृति भी किस नायाब ढंग से सारा इंतजाम करती है। सर्दियों में बर्फ के रूप में जल संग्रह कर लेती है और गर्मियों में पानी के लिए जब त्राहि-त्राहि मचती है तो ये ही बर्फ शिलाएँ पिघल -पिघल जलधारा बन हमारे सूखे कंठों को तरावट पहुँचती हैं। कितनी अद्भुत व्यवस्था है जल संचय की!” मणि हिमालय के आगे अपना सिर झुका लेती है।

    थोड़ा और आगे चलने पर लेखिका को कुछ फौजी छावनियाँ दिखाई देती हैं। तभी उसे ध्यान आता है कि ये बॉर्डर एरिया है। थोड़ी दूर पर चीन सीमा लगती है। तभी लेखिका एक फौजी से पूछती है, आपको कड़कड़ाती ठंड में परेशानी होती होगी? तब वह हँसकर कहता है, आप लोग चैन से सो सकें, तभी हम यहाँ पर पहरा देते हैं। फौजियों को देखकर लेखिका का मन उदास हो जाता है। हम यहाँ पर पाँच मिनट में ठिठुरने लगे, जबकि फौजी यहाँ रहकर हमेशा सुरक्षा करते रहते हैं। जलेबी की तरह घुमावदार खतरनाक रास्तों से लेखिका डर जाती है। इन रास्तों को बनाने में कितने लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी होगी। लेखिका के लिए यह यात्रा सचमुचएक खोज यात्रा थी।       

पार्ट-10 sana sana hath jodi summary

       इसके बाद लेखिका यूमथांग की ओर वापस होती है। यूमथांग की घाटियों में उस समय ढेरों-ढेर प्रियुता और रूडोडेंड्रो के बहुत ही खूबसूरत फूल खिले थे। यूमथांग वापस आने से लेखिका थोड़ी उदास थी। क्योंकि यहाँ पर कटाओ की तरह बर्फ नहीं थी। वहीं पर लेखिका ने चिप्स बेचती एक सिक्किमी युवती से पूछा क्या तुम सिक्किमी हो?” वह जवाब देती है, “नहीं मैं इंडियन हूँ”। ये सुनकर लेखिका को बहुत अच्छा लगा। सिक्किम के लोग भारत में मिलकर काफी खुश हैं। जब सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं था। बल्कि एक स्वतंत्र रजवाड़ा था। तब टूरिस्ट उद्योग इतना नहीं था। लेकिन अब सिक्किम भारत में पूरी तरह से घुलमिल गया है। और ऐसा लगता ही नहीं, कभी सिक्किम भारत में था। अब ये लोग भारत का हिस्सा बनकर काफी खुश हैं।

पार्ट-11

जीप में बैठते समय एक पहाड़ी कुत्ता रास्ता काट देता है। मणि बताती है कि ये पहाड़ी कुत्ते हैं। ये भौकते नहीं हैं। ये केवल चाँदनी रात में ही भोंकते हैं। यह सुनकर लेखिका हैरान हो जाती है। थोड़ा आगे चलने पर एक पत्थर  दिखाई देता है। जिस पर गुरुनानक के फुट प्रिंट बने होते हैं। नार्गे कहता है कि लोगों का मानना है, यहाँ गुरुनानक की थाली से कुछ चावल गिर गए थे। जिस जगह पर चावल गिरे थे, वहाँ पर चावल की खेती होती है।

      लगभग तीन-चार किलोमीटर चलने के बाद नार्गे ने बताया, ये एक किलोमीटर का एरिया खेदुम है। यहाँ देवी-देवताओं का निवास है। यहाँ जो गंदगी करता है, मर जाता है। लेखिका कहती है, तुम गंदगी नहीं फैलाते हो?  वह कहता है, अगर हम गंदगी करेंगे तो मर जाएँगे। मैडम हम झरने, नदी और पहाड़ों की पूजा करते हैं। लेखिका कहती है, तभी गैंगटॉक इतना सुंदर है। नार्गे लेखिका से कहता, गैंगटॉक नहीं मैडम गंतोक कहिए”। जिसका अर्थ होता है पहाड़।

पार्ट-12    sana sana hath jodi summary

  नार्गे ने बताया मैडम, सिक्किम पहले टूरिस्ट स्पॉट नहीं था। जब यह  भारत में मिला उसके कई वर्षों बाद भारत के आर्मी कप्तान शेखर दत्ता ने इसे  टूरिस्ट स्पॉट बनाया।

     अभी भी रास्ते बन रहे थे। नए-नए स्थानों की खोज चालू थी। लेखिका अपने मन ही मन में सोच रही थी, शायद मनुष्य की इसी असमाप्त खोज का नाम सौन्दर्य है।

जीप आगे बढ़ने लगती है।


धन्यवाद!

साना साना हाथ जोड़ि

डॉ. अजीत भारती

 

By hindi Bharti

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