class 9 hindi kya likhu
class 9 hindi kya likhu? अगर आप इस चैप्टर के शब्द और अर्थ, पाठ का सार एवं सरल भाषा में प्रश्न और उत्तर तलाश रहे हो तो आप सही जगह पर आए हो आपका बहुत-बहुत स्वागत है । यहाँ आपको प्रत्येक प्रश्न स्पष्ट ढंग से बताया गया है और आप परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे। इसका अभ्यास करने से आप अच्छे अंक के साथ चैप्टर को ठीक-ठीक समझ पाएंगे।
NCERTClass-9 विषय-हिंदी (पुस्तक- “गंगा”)
पाठ-2. क्या लिखूँ-पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
(पाठ का सार)
इस पाठ में लेखक ने निबंध लिखने की कठिनाई और प्रक्रिया दोनों को रोचक ढंग से बताया है। शुरु में वह बताते हैं कि कुछ लोगों के अनुसार लिखने के लिए एक विशेष मानसिक अवस्था चाहिए, जिसमें विचार अपने-आप आते हैं। लेकिन लेखक मानता है कि उसे ऐसा अनुभव नहीं होता, उसे निबंध लिखने के लिए मेहनत और सोच-विचार करना पड़ता है।
लेखक को दो विषयों पर निबंध लिखना है-“दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और “समाज सुधार”। वह उलझन में पड़ जाता है कि इन पर कैसे लिखा जाए।
वह निबंध लिखने के नियमों को समझने की कोशिश करता है, जैसे- निबंध छोटा होना चाहिए, उसमें सामग्री और अच्छी भाषा होनी चाहिए, पहले रूपरेखा बनानी चाहिए आदि। लेकिन उसे लगता है कि इन नियमों का पालन करना आसान नहीं है।
फिर लेखक अंग्रेजी निबंधकारों की शैली अपनाने की सोचता है, जिसमें अपने अनुभव और भावों को सरल रूप में लिखा जाता है।
वह अमीर खुसरो की कहानी से प्रेरणा लेकर दोनों विषयों को एक ही निबंध में जोड़ देता है।
आगे वह समझाता है कि “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का अर्थ है कि दूर की चीजें हमें अच्छी लगती हैं, क्योंकि हम उनकी सच्चाई नहीं जानते। इसी तरह युवा लोग भविष्य को अच्छा मानते हैं और बुजुर्ग लोग बीते हुए समय को अच्छा मानते हैं, जबकि वर्तमान से सभी असंतुष्ट रहते हैं।
अंत में लेखक बताता है कि समाज में हमेशा सुधार की आवश्यकता रहती है। समय के साथ विचार बदलते रहते हैं और जो आज नया है, वह कल पुराना हो जाता है। इसलिए जीवन लगातार बदलता रहता है और प्रगति करता रहता है।
शब्दसम्पदा-कठिन शब्दों के अर्थ
| क्र. | शब्द | अर्थ |
| 01 | स्फूर्ति | फुरती, उत्तेजना, कंपन, उछलना, मन में प्रकट होना |
| 02 | आवेग | बिना सोचे-विचारे कुछ कर बैठने की आन्तरिक प्रेरणा, अशांति,
उतावली, एक संचारी भाव |
| 03 | यथार्थता
/यथार्थ |
सत्य, प्रकृत, उचित |
| 04 | उत्थित | उठा हुआ, उठता हुआ, बल-वैभव में बढ़ा हुआ, उत्पन्न, ऊँचा, फैलाया हुआ |
| 05 | रहस्य | गुप्तभेद, गोपनीय विषय, मर्म |
| 06 | विज्ञों/विज्ञ | जानकार, समझदार, विद्वान |
| 07 | सम्मति | सहमति, स्वीकृति, अनुमति, राय, मत, आदर, सम्मान |
| 08 | अनुसंधान | अन्वेषण, खोज, जाँच-पड़ताल, प्रयत्न, योजना, आयोजन |
| 09 | विश्वकोश | वह ग्रंथ जिसमें संसार के सारे विषयों का विवरण हो, वह भंडार जिसमें विश्व की सारी वस्तुएँ संगृहीत हों |
| 10 | दुर्बोधता/
दुर्बोध |
जो शीघ्र समझ में न आए, गूढ़ |
| 11 | गांभीर्य | गंभीरता, गहराई, चित्त की स्थिरता, जटिलता |
| 12 | गुत्थी | उलझन, कठिनाई, तागे आदि में उलझने से पड़ी हुई गाँठ |
| 13 | अज्ञों/अज्ञ | ज्ञानरहित, नासमझ, अचेतन |
| 14 | पद्धति | प्रथा, परिपाटी, मार्ग, पथ, रास्ता, प्रणाली |
| 15 | पाश्चात्य | पश्चिम का, बाद का, पच्छिमी, पिछला हिस्सा |
| 16 | आख्यायिका | सिलसिलेवार कहानी या वृत्तांत, शिक्षा देने वाली कल्पित कथा |
| 17 | उदात्त | ऊँचा, महान, श्रेष्ठ, उदार, प्रसिद्ध, प्रिय, ऊँचे स्वर में उच्चरित |
| 18 | अभिव्यक्ति | व्यक्त, प्रकट होना, प्रकाशन |
| 19 | अनुसरण | पीछे चलना, अनुकरण, अभ्यास, अनुकूल आचरण |
| 20 | समावेश | साथ रहना, शामिल होना, मिलना, एकत्र होना, प्रवेश |
| 21 | संध्या | शाम का वह समय जब दिन के दो भागों का मेल होता है, साँझ, योग, मेल, ठहराव, सीमा |
| 22 | अंकित | लिखित, चिह्नित, चित्रित, गिना हुआ |
| 23 | कोलाहल | बहुत से लोगों के एक साथ बोलने से होने वाला शोर, हंगामा, हल्ला |
| 24 | विषाद | अवसाद, उदासी, तंद्रा |
| 25 | कलरव | मधुर ध्वनि, कोमल |

अभ्यास/प्रश्न-उत्तर |
| मेरे उत्तर मेरे तर्क |
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको वे उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न-1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है…असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट‘ और ‘खूँटी‘ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तर- (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।
उपयुक्त कारण- यहाँ ‘हैट’ मुख्य विषय या विचार का प्रतीक है और ‘खूँटी’ केवल सहारा है। लेखक बताना चाहता है कि निबंध में विषय से अधिक लेखक के विचार और भाव महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न-2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।”मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
उत्तर- (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।
उपयुक्त कारण- मानटेन ने निबंध लेखन में व्यक्तिगत अनुभव, स्वतंत्र विचार और स्वाभाविक अभिव्यक्ति को महत्व दिया है।
प्रश्न-3. “तरुणों(जवान/युवा) के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
उत्तर- (घ) अभिलाषा और अनुभव।
उपयुक्त कारण- तरुण(जवान/युवा) भविष्य की आशाओं और इच्छाओं में जीते हैं, जबकि वृद्ध अपने अनुभवों और बीते समय की यादों में सुख पाते हैं।
प्रश्न-4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
उत्तर- (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।
उपयुक्त कारण- अमीर खुसरो की कहानी से उनकी बुद्धिमत्ता और एक साथ अनेक विषयों पर उत्तर देने की क्षमता प्रकट होती है।
प्रश्न-5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं
उत्तर- (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
उपयुक्त कारण- समाज में समय-समय पर नई समस्याएँ उत्पन्न होती रहती हैं, इसलिए सुधार की आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होती।
मेरी समझ मेरे विचार |
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न-1.निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर- ए.जी. गार्डिनर निबंध लेखन में विषय, क्रमबद्धता और गंभीर विचारों को अधिक महत्व देते हैं। उनके अनुसार निबंध सुव्यवस्थित और प्रभावशाली होना चाहिए। जबकि लेखक का मानना है कि निबंध में लेखक के निजी विचार, अनुभव, भावनाएँ और स्वच्छंद विचार अधिक महत्वपूर्ण होती है। लेखक के अनुसार निबंध में विषय केवल आधार होता है, मुख्य बात लेखक की अभिव्यक्ति है।
प्रश्न-2.लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण(नवयुवक) दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर- तरुण(नव युवक) वर्तमान से इसलिए असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे अपने भविष्य के बड़े सपने देखते हैं और उन्हें जल्दी पूरा करना चाहते हैं। वे सफलता, सम्मान और नई उपलब्धियों की इच्छा रखते हैं।
दूसरी ओर वृद्ध लोग वर्तमान से इसलिए असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि उन्हें अपना बीता हुआ समय अधिक अच्छा लगता है। वे वर्तमान समय के बदलावों से स्वयं को अलग महसूस करते हैं और पुराने दिनों को याद करते हैं।
प्रश्न-3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
उत्तर- नमिता और अमिता लेखक से अलग-अलग विषयों पर निबंध लिखवाना चाहते थे। वे सामान्य और सामाजिक विषय सुझाती हैं। लेखक को इन विषयों पर निबंध लिखने में कठिनाई इसलिए हुई क्योंकि कुछ विषयों पर उसके पास पर्याप्त जानकारी नहीं थी और कुछ विषयों में उसकी रुचि नहीं थी। लेखक को ऐसे विषयों पर अपने विचार व्यवस्थित लिखने में भी कठिनाई हुई।
प्रश्न-4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर- निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने के के लिए विषय का ज्ञान, विचारों की स्पष्टता, भाषा की सरलता, क्रमबद्धता, रोचक शैली तथा प्रभावशाली निष्कर्ष जैसी युक्तियाँ सुझाई हैं।
मैं किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले उस विषय की जानकारी एकत्र करता हूँ, मुख्य बिंदु लिखता हूँ, उदाहरण सोचता हूँ और फिर भूमिका, मुख्य भाग तथा उपसंहार की योजना बनाकर निबंध लिखता हूँ।
प्रश्न-5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर- निबंध लेखन में देखने, सुनने और अनुभव करने का बहुत महत्व है। इससे लेखक को वास्तविक जीवन की जानकारी मिलती है। उसके विचार अधिक सच्चे, प्रभावशाली और रोचक बनते हैं। अनुभव के आधार पर लिखा गया निबंध पाठकों को अधिक प्रभावित करता है, क्योंकि उसमें जीवन की सच्चाई और स्वाभाविकता होती है।
निबंध लिखने की कला
‘निबंध‘ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना‘ (निबंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं।
शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख में दर्शाइए और बताइए कि अबको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?
उत्तर- निबंध लेखन की प्रक्रिया: एक प्रभावी अभिव्यक्ति का माध्यम है।
निबंध लेखन की सामान्य प्रक्रिया- निबंध लेखन को समझने के लिए इसे निम्न चरणों में बाँटा जा सकता है—
1.विषय का चयन- सबसे पहले एक उपयुक्त विषय का चयन किया जाता है। विषय ऐसा होना चाहिए जिसमें लेखक की रुचि हो और जिस पर वह पर्याप्त विचार प्रस्तुत कर सके।
2.विचार-संग्रह- विषय से संबंधित सभी विचार, तथ्य, उदाहरण और अनुभव एकत्र किए जाते हैं। यह चरण निबंध की नींव होता है।
3.रूपरेखा बनाना- एकत्रित विचारों को क्रम में सजाकर रूपरेखा तैयार की जाती है। इससे निबंध में एकता और स्पष्टता बनी रहती है।
4.भूमिका- निबंध की शुरुआत आकर्षक और विषय से संबंधित होनी चाहिए, जिससे पाठक की रुचि जागृत हो।
5.मुख्य भाग- इसमें विषय से जुड़े सभी बिंदुओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। प्रत्येक अनुच्छेद एक मुख्य विचार पर आधारित होना चाहिए।
6.निष्कर्ष- अंत में पूरे निबंध का सार प्रस्तुत किया जाता है और एक प्रभावशाली संदेश दिया जाता है।
भाव-विस्तारविचार |
प्रश्न-1. “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
उत्तर– इस कथन का आशय है कि जो युवा अभी जीवन की कठिनाइयों, संघर्षों और जिम्मेदारियों से दूर हैं, उन्हें संसार बहुत सुंदर और अच्छा दिखाई देता है। वे जीवन के वास्तविक दुखों और समस्याओं से परिचित नहीं होते, इसलिए उन्हें सब कुछ मनमोहक लगता है।
प्रश्न-2. “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
उत्तर- इस कथन का भावार्थ है कि हर युग में समाज में कुछ न कुछ कमियाँ और बुराइयाँ रही हैं। इसलिए समाज को बेहतर बनाने के लिए हमेशा सुधारों की आवश्यकता पड़ती रही है। सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
प्रश्न-3. “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
उत्तर- इस कथन से लेखक कहना चाहता है कि आज के युवा भविष्य के सपने देखते हैं, लेकिन जब वे वृद्ध होंगे तो अपने बीते हुए समय को याद करके उसी को श्रेष्ठ मानेंगे। यह मनुष्य स्वभाव है कि वह उम्र के अनुसार अपने दृष्टिकोण बदलता रहता है।
प्रश्न-4. “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
उत्तर- इस कथन का तात्पर्य है कि निबंध संक्षिप्त, स्पष्ट और प्रभावशाली होना चाहिए। छोटा निबंध पढ़ने वाले को अधिक आकर्षित करता है और अपने विचारों को सरलता से प्रस्तुत करता है, जबकि बहुत बड़ा निबंध बोझिल हो सकता है।
मेरा अनुभव |
प्रश्न- इस निबंध में लेखक को दो विषयों (‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं‘ और ‘समाज-सुधार‘) पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर– मुझे प्रकृति, मेरा विद्यालय, मेरा प्रिय खेल, मेरा मित्र, त्योहार, स्वच्छता और पर्यावरण जैसे विषयों पर लिखना सरल लगा, क्योंकि ये विषय हमारे दैनिक जीवन से जुड़े होते हैं। इनके बारे में मुझे पहले से जानकारी होती है, इसलिए विचार आसानी से आ जाते हैं।
मुझे विज्ञान, समाज-सुधार, बेरोजगारी, जनसंख्या वृद्धि और तकनीकी विकास जैसे विषयों पर लिखना कठिन लगा, क्योंकि इन विषयों के लिए अधिक जानकारी, तर्क और उदाहरणों की आवश्यकता होती है। ऐसे विषयों पर सही ढंग से लिखने के लिए पहले तैयारी करनी पड़ती है।
विषयों से संवाद anubahav |
प्रश्न-1.निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर- बुद्धदेव– अहिंसा, करुणा और सत्य का संदेश दिया। उन्होंने अंधविश्वास और जाति-पाँति का विरोध किया।
महावीर स्वामी- उन्होंने सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और आत्मसंयम का उपदेश दिया।
नागार्जुन- उन्होंने बौद्ध दर्शन का प्रचार किया और ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा दिया।
शंकराचार्य- उन्होंने भारतीय संस्कृति और वेदांत दर्शन का प्रचार किया तथा समाज को एकता का संदेश दिया।
कबीर- उन्होंने जात-पाँत, पाखंड और धार्मिक भेदभाव का विरोध किया।
गुरु नानक– उन्होंने समानता, भाईचारा, ईमानदारी और सेवा का संदेश दिया।
प्रश्न-2.निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर-1.कैलाश सत्यार्थी बाल श्रम के विरोध और बच्चों की शिक्षा के लिए कार्य करते हैं।
2.सुधा मूर्ति शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करती हैं।
3.सेवा संस्थाएँ गरीबों और दिव्यांगजनों की सहायता करती हैं।
4.पर्यावरण संगठन वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता अभियान चलाते हैं।
5.महिला समूह स्त्री-शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए कार्य करते हैं।
प्रश्न-3.आपको ‘समाज-सुधार‘ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर- यदि मुझे समाज-सुधार का अवसर मिले तो मैं शिक्षा का प्रसार, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सम्मान और समानता पर कार्य करना चाहूँगा। मैं लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाऊँगा, गरीब बच्चों की पढ़ाई में सहायता करूँगा, वृक्षारोपण कराऊँगा और समाज में भेदभाव मिटाने का प्रयास करूँगा।
प्रश्न-4 भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर- भारतीय ज्ञान साहित्य हमें सिखाता है कि जीवन में नैतिकता, आध्यात्मिकता और व्यवहारिकता तीनों का संतुलन आवश्यक है। नैतिकता हमें सही मार्ग दिखाती है, आध्यात्मिकता मन को शांति देती है और व्यावहारिकता जीवन को सफल बनाती है। यदि मनुष्य इन तीनों का संतुलन बनाए रखे तो उसका जीवन सुखी और सफल बन सकता है।
सृजन |
प्रश्न-1. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं‘ एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।
आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी ‘आम के आम गुठलियों के दाम‘। अब आप इस लोकोक्ति और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास‘ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर-‘आम के आम गुठलियों के दाम‘ लोकोक्ति का अर्थ है एक कार्य से दोहरा लाभ प्राप्त होना। जैविक खाद की निर्मिति में यह लोकोक्ति पूरी तरह सही बैठती है। घरों से निकलने वाले फल-सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते और रसोई का कचरा फेंकने के बजाय उनसे जैविक खाद बनाई जा सकती है। इससे एक ओर कचरा कम होता है और दूसरी ओर खेतों तथा बगीचों के लिए उत्तम खाद मिलती है। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है और पर्यावरण भी स्वच्छ रहता है। इस प्रकार जैविक खाद बनाकर हमें दो लाभ मिलते हैं, इसलिए कहा जा सकता है-‘आम के आम गुठलियों के दाम‘।
प्रश्न-2. “जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।”
आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर- डायरी लेखन
दिनांक: 28 अप्रैल 2026
आज मुझे एक पुरानी कहावत याद आई-‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं।‘ कुछ समय पहले मैं अपने शहर के एक बड़े विद्यालय के बारे में सुनता था। लोग उसकी बहुत प्रशंसा करते थे। मुझे लगता था कि वहाँ पढ़ाई का वातावरण बहुत अच्छा होगा और सभी सुविधाएँ उत्तम होंगी।
जब मुझे उस विद्यालय को निकट से देखने का अवसर मिला, तब मेरा अनुभव अलग रहा। भवन तो सुंदर था, पर वहाँ अनुशासन की कमी थी। कुछ विद्यार्थी पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे और कई सुविधाएँ केवल दिखावे की थीं।
इस अनुभव से मैंने सीखा कि किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के बारे में केवल सुनकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। वास्तविकता का पता निकट जाकर ही चलता है।
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भाषा से संवाद-
समास |
व्याकरण की बात
“मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों ‘निबंध‘ और ‘रचना‘ के मेल से बना है जिसका अर्थ है- निबंध की रचना।
समाससमास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है, जैसे-गंगा + जल= गंगाजल, देश+भक्ति = देशभक्ति। इस प्रकार समास वह शब्द रचना है. जिसमें दो (या दो से अधिक), अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले, स्वतंत्र शब्द रचना के अंग होते हैं। समास रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। जैसे- गंगाजल में ‘गंगा‘ पूर्वपद और ‘जल‘ उत्तरपद है। इसी तरह देशभक्ति शब्द में ‘देश‘ को पूर्वपद और ‘भक्ति‘ को उत्तरपद कहेंगे। समास रचना से बने शब्द को ‘समस्त पद‘ कहते हैं; जैसे- गंगाजल, देशभक्ति। यदि समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग-अलग करने हों, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं। जैसे यदि ‘गंगाजल‘ समस्त पद के अंग अलग-अलग (समास विग्रह) करें, तो दो पद निकलेंगे- गंगा और जल। समास विग्रह इस प्रकार लिखते हैं- गंगाजल = गंगाजल (गंगा का जल)।
|
समास के छह प्रमख भेद हैं
| 1. | तत्पुरुष समास | इस समास में उत्तर पद प्रधान होता और पूर्वपद गौण होता है। तत्पुरुष समास की रचना में समस्त पदों के बीच में आने वाले परसर्गों (का,से,पर आदि) का लोप हो जाता है।
जैसे- रसोईघर- रसोई+घर=रसोई के लिए घर |
| 2. | कर्मधारय समास | कर्मधारय समास में पूर्वपद विशेषण तथा उत्तर पद विशेष्य होता है अथवा पूर्वपद और उत्तरपद में उपमेय-उपमान का संबंध होता है
जैसे-नीलकमल=नील+कमल=नीले रंग का कमल |
| 3. | द्विगु समास | जिन समासों का पूर्वपद संख्यावाची शब्द हो, वह द्विगु समास होता है
अर्थ की दृष्टि यह समास प्रायः समूहवाची होता है जैसे- तिरंगा=तीन रंगों का समाहार |
| 4. | बहुव्रीहि समास | बहुव्रीहि समास के दोनों पद गौण होते हैं तथा ये दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद के विषय में कुछ संकेत करते हैं ।
अन्य पद ही प्रधान होता है जैसे- पीताम्बर=पीत +अंबर=पिला है अंबर (वस्त्र)जिसका अर्थात् कृष्ण/विष्णु |
| 5. | द्वंद्व समास | इस समास में दोनों ही पद प्रधान होते हैं तथा दोनों पदों को जोड़ने वाले समुच्चयबोधक अव्यय का लोप हो जाता है।
अव्यय वे शब्द होते हैं जिनमें वचन, लिंग, पुरुष आदि की दृष्टि से कोई रूप परिवर्तन नहीं होता है। जैसे-भाई-बहन=भई और बहिन |
| 6. | अव्ययीभाव समास | इस समास में पूर्वपद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय (क्रिया-विशेषण) का काम करता है।
जैसे-यथाशक्ति= यथा + शक्ति = शक्ति के अनुसार पुनरुक्त शब्दों में समास होने पर भी अव्ययीभाव समास होता है जैसे- धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी, दिनोंदिन । |
निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूंढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए।
उत्तर-पाठ में आए समास और उनका विग्रह
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास |
| जन्मदाता | जन्म देने वाला | तत्पुरुष समास |
| विवाहोत्सव | विवाह का उत्सव | तत्पुरुष |
| जीवन-संग्राम | जीवन रूपी संग्राम | कर्मधारय समास |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| पुस्तकालय | पुस्तकों के लिए आलय | तत्पुरुष |
उपसर्ग एवं प्रत्यय |
- “सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है।”
- समाज-सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है।”
दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। दोनों रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘बोध‘ के पहले ‘दर‘ उपसर्ग और ‘आदि‘ के पहले ‘अन्‘ उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। उपसर्ग भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता है। ये शब्दों के आरम्भ में लगकर नए शब्दों का का निर्माण करते हैं।
अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को देखिए-
- “आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं।”
- “लेखों का शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती है।”
रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘सुधार‘ के बाद में ‘क‘ प्रत्यय और ‘कठिन’ शब्द के बाद में ‘आई’ प्रत्यय जोडकर नए शब्द बनाए गए है। प्रत्यय भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड है जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप में नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
1.निबंध में उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूंढकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर-
- नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए-
- निबंध लिखना बड़ी—————(कठिन) की बात है।
उत्तर- निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।
(कठिन + आई = कठिनाई)
- वर्तमान से दोनों को——————-(संतोष) होता है।
उत्तर- वर्तमान से दोनों को संतोष होता है।
(यह शब्द पहले से ही पूर्ण है, इसमें परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है)
- वाक्यों में कछ—————-(स्पष्ट) भीचाहिए, क्योंकि यह—————(स्पष्ट) या————–(बोध) गांभीर्य ला देती है।
उत्तर- वाक्यों में कुछ स्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या अबोधता गंभीरता ला देती है।
(स्पष्ट + ता = स्पष्टता,
अ + स्पष्ट + ता = अस्पष्टता,
अ + बोध + ता = अबोधता)
- नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।
| मधुर मधुरता, मधुरमय, सुमधुर |
उदाहरण-मधुर= मधुरता, मधुरमय, सुमधुर
भाव एक शब्द अनेक
प्रश्न- इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते ही उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द दिए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
गतिविधियों
- “खीर पकाई जतन से, चरखा दिवा चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।
पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यम्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उददेश्य में ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियो, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से डेंढकर संकलन कीजिए
- कक्षा में युवा और वृद्धदो पीढ़ियों के पीढीगत अतर पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए माप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
===x===x===x===x===x===x===x=डॉ.अजीत भारती
क्या लिखूँ –https://ncert.nic.in/textbook/pdf/ihga102.pdf
दो बैलों कि कथा –https://hindibharti.in/do-bailon-ki-katha-class-9/ Edit