ram lakshman parshuram samvad class 9
ram lakshman parshuram samvad class 9? इसमें चैप्टर 9 के पाठ का सार, प्रश्न-उत्तर, और mcq बहुत ही सरल भाषा में दिए गए हैं जो छात्रों के लिए बहुत उपयोगी है।
Class-9 NCERT हिंदी बुक-“गंगा”
पाठ-9.राम लक्ष्मण परशुराम संवाद-तुलसीदास
यह चैप्टर “रामचरित मानस” के बाल कांड से लिया गया है। इसमें सीता स्वयंवर के समय श्रीराम शिव धनुष को उठाकर उसकी डोरी चढ़ाते हैं तो धनुष टूट जाता है। उसके बाद उसी समय परशुराम जी आ जाते हैं, वे टूटा हुआ धनुष देखकर क्रोधित हो जाते हैं और जनक से पूछते हैं कि इस शिव धनुष को किसने तोड़ा है? इस चैप्टर में राम के धैर्य, साहस, मर्यादा और वीरता का, लक्ष्मण की निष्ठा एवं परशुराम के क्रोधी स्वभाव का व्यंग्यात्मक ढंग से चित्रण किया गया है।
पहला पदः-
तुलसीदास जी वर्णन करते हैं कि सभा में परशुराम के आने पर उन्हें देखकर सभी राजा डर जाते हैं। सभी राजा पिता के के साथ परशुराम जी को दंडवत प्रणाम करते हैं। परशुराम जिन राजाओं को पसंद करते हैं वे राजा उनसे बिना डरे मिलते हैं।
इसके बाद राजा जनक फिर से परशुराम को प्रणाम करते हैं और सीता को बुलाकर उससे भी प्रणाम करवाते हैं। परशुराम सीता को आशीर्वाद देते हैं। यह देखकर सीता की सहेलियाँ प्रसन्न/खुश हो जाती हैं और उन्हें अपने साथ वापस ले जाती हैं।
उसके बाद परशुराम जी विश्वामित्र से मिलने के लिए आगे बढ़ते हैं। राम और लक्ष्मण दोनों भाई परशुराम के कमल रूपी चरणों को छूकर प्रणाम करते हैं। वे खुश होकर दोनों को आशीर्वाद देते हैं। वे (परशुराम) उनके सुंदर रूप को देखकर प्रसन्न होते हैं। परशुराम जी राम की सुंदरता को देखकर दंग रह जाते हैं। उनकी यह सुंदरता कामदेव के घमंड को भी तोड़ देता है।
परशुराम जी सब जानते हैं लेकिन फिर भी अनजान बनकर राजा जनक से पूछते हैं कि इस सभा में भीड़ क्यों है? शिव धनुष टूटने कारण उनका शरीर क्रोध से जल रहा था।
दूसरे पद
इसमें तुलसीदास जी वर्णन करते हैं कि राजा जनक परशुराम जी को शिव धनुष टूटने की पूरी कहानी सुनाते हैं और सभी राजा सीता विवाह स्वयंवर के कारण सभा में आए हैं। परशुराम इधर-उधर देखते हैं तो उन्हें धरती पर धनुष टूटा हुआ दिखाई देता है। वे धनुष के टुकड़ों को देखकर बहुत क्रोधित हो जाते हैं और क्रोध (गुस्से) में जनक से पूछते हैं कि हे मूर्ख जनक! ये धनुष किसने तोड़ा है बताओ? हे मूर्ख! उसे तुरंत मेरे सामने खड़ा करो, नहीं तो तुम्हारे राज्य की धरती उलट-पुलट कर नष्ट कर दूँगा।
परशुराम के कठोर वचन सुनकर राजा जनक डर के कारण कुछ नहीं बोल पाते हैं। लेकिन सभा में कुछ कपटी स्वभाव वाले राजा मन ही मन में हँस रहे थे। देवता, मुनि, नाग, नगर के सभी स्त्री-पुरुषों के हृदय में भय और चिंता समा गई थीं। सीता की माँ सुनयना को पछतावा हो रहा था, लोगों को लग रहा था कि विधाता ने बनी बनाई बात बिगाड़ दी।
परशुराम के क्रोध को देखकर सीता आधा पलक बंद करतीं तो उन्हें एक युग के समान भारी लग रहा था।
जब श्रीराम ने देखा कि सभी लोग भयभीत हैं और सीता डरी हुई हैं। तब राम के मन में न कोई खुशी थी और न कोई दुःख या चिंता थी। वे पूरी तरह से शांत थे। सभी का भय दूर करने और स्थिति को संभालने के लिए राम मधुर एवं गंभीर वाणी में बोलते हैं।
तीसरे पद
इस में तुलसीदास जी कहते हैं कि सीता स्वयंवर में शिव धनुष के टूट जाने पर परशुराम क्रोधित हो जाते हैं और धनुष तोड़ने वाले को सजा देने के लिए कहते हैं। परशुराम को क्रोध देखकर पूरी सभा डर जाती है। तब राम आगे आते हैं और परशुराम के आगे हाथ जोड़कर कहते हैं कि हे स्वामी! धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास/भक्त होगा। मेरे लिए क्या आज्ञा है? आप मुझे आदेश दीजिए।
इतना सुनकर परशुराम क्रोध में कहते हैं कि सेवक वो होता है जो सेवा का काम करे। उसने धनुष तोड़कर भलाई वाला काम नहीं किया है। उसने धनुष तोड़कर लड़ाई वाला काम किया है। सुनो राम! जिसने भी इस धनुष को तोड़ा है वह मेरा सहस्रबाहु के समान दुश्मन कहलाएगा। वह इस सभा से बाहर निकलकर आ अजय और अपना अपराध स्वीकार कर ले, नहीं तो सारे राजा मारे जाएँगे।
परशुराम के कठोर वचन सुनकर लक्ष्मण जी मुस्कुराते हैं और परशुराम जी का अपमान करते हुए कहते हैं कि हे गोसाईं! मैंने बचपन में ऐसे कई धनुष तोड़े तब आपने इतना क्रोध नहीं किय। इसी धनुष से इतना लगाव क्यों है?
लक्ष्मण की बातें सुनकर परशुराम क्रोधित होकर बोलते हैं- अरे राजा के बालक! मृत्यु के वश में होने पर तुझे होश नहीं है कि तू क्या बोल रहा है। अरे मूर्ख! जिसे तू साधारण धनुष बता रहा है वह कोई साधारण धनुष नहीं है। पूरा संसार जानता है कि यह शिवजी का प्रसिद्ध धनुष है।
इसी के साथ राम लक्ष्मण परशुराम संवाद चैप्टर समाप्त हुआ।
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[ अभ्यास / प्रश्न-उत्तर ]
रचना से संवाद
| मेरे उत्तर मेरे तर्क |
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न-1. “पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?
(क) आदर और सम्मान
(ख) भक्ति और श्रद्धा
(ग) भय और शिष्टाचार
(घ) प्रेम और सहिष्णुता
उत्तर-1. (क) आदर और सम्मान
उपयुक्त कारण– सभा में उपस्थित सभी राजा एवं अतिथि अपना-अपना परिचय देकर परशुराम को दंडवत प्रणाम करते हैं। यह उनके प्रति आदर, सम्मान और शिष्टाचार की भावना को प्रकट करता है।
उत्तर-2. (ग) भय और शिष्टाचार
उपयुक्त कारण- सभी लोग परशुराम से भयभीत थे। कोई भी उनके प्रति आदर, भक्ति या प्रेम नहीं रखता था। सभी ने भय और शिष्टचार के नाते अपना-अपना परिचय दिया।
प्रश्न-2. “जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है?
(क) संवेदनशीलता
(ख) शिष्टता
(ग) सहनशीलता
(घ) उदासीनता
उत्तर- (ख) शिष्टता
उपयुक्त कारण- राजा जनक स्वयं आगे बढ़कर परशुराम को प्रणाम करते हैं तथा सीता से भी प्रणाम करवाते हैं। इससे उनकी विनम्रता, शिष्टाचार और अतिथि-सम्मान की भावना प्रकट होती है।
प्रश्न-3. “अति रिस बोले बचन कठोरा।” जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था-
(क) उचित आदर-सत्कार न मिलना
(ख) जनक द्वारा समाचार छिपाना
(ग) शिव-धनुष का खंडित होना
(घ) अन्य राजाओं की सभा में उपस्थिति
उत्तर- (ग) शिव-धनुष का खंडित होना
उपयुक्त कारण– परशुराम भगवान शिव के परम भक्त थे। शिव-धनुष के टूटने का समाचार सुनकर वे बहुत क्रोधित हो गए और इसी कारण उन्होंने राजा जनक के प्रति कठोर वचन कहे।
प्रश्न-4. राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) कूटनीति और चतुराई
(ख) विनम्रता और मर्यादा
(ग) त्याग और समर्पण
(घ) दृढ़ता और आत्मविश्वास
उत्तर- (ख) विनम्रता और मर्यादा
उपयुक्त कारण- राम स्वयं को परशुराम का सेवक बताते हैं। इससे उनकी विनम्रता, मर्यादा, बड़ों के प्रति सम्मान तथा शांत स्वभाव का परिचय मिलता है।
प्रश्न-5. “सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।” लक्ष्मण के मुसकराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था?
(क) वे सभा में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे।
(ख) उन्हें राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना था।
(ग) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे।
(घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।
उत्तर- (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।
उपयुक्त कारण- लक्ष्मण परशुराम के बार-बार क्रोध करने और कठोर वचन कहने से प्रसन्न नहीं थे। इसलिए उन्होंने मुस्कुराते हुए व्यंग्य में उत्तर दिए, जिससे वे परशुराम के क्रोध को चुनौती देते हुए उनके अहंकार कम कर सकें।
| मेरी समझ मेरे विचार
|
- नीचे दिए गए प्रश्नों पर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न-1. “अरध निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?
उत्तर- यह पंक्ति राजा जनक के संदर्भ में कही गई है। जब परशुराम क्रोधित होकर सभा में आए और शिव-धनुष टूटने का कारण पूछने लगे, तब राजा जनक अत्यंत चिंतित और भयभीत हो गए। उस समय उन्हें आधा निमेष (क्षण) भी कल्प (बहुत लंबा समय) के समान प्रतीत होने लगा। इस पंक्ति का भाव यह है कि चिंता, भय और संकट की स्थिति में समय बहुत लंबा प्रतीत होता है।
प्रश्न-2.”सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर- परशुराम की इस कठोर चेतावनी से सभा के सभी राजा भयभीत हो गए होंगे। क्योंकि परशुराम अपने पराक्रम और क्रोध के लिए प्रसिद्ध थे। इसलिए सभी राजा शांत हो गए और किसी ने भी उनका विरोध करने की हिम्मत नहीं की। इससे सभा का वातावरण गंभीर, तनावपूर्ण और भयपूर्ण हो गया।
प्रश्न-3. तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का ‘विनय‘ का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के ‘तर्क‘ का? अपने उत्तर का उचित कारण और तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- मेरी दृष्टि में राम का ‘विनय’ का मार्ग ज्यादा ठीक है। उन्होंने परशुराम के क्रोध का उत्तर धैर्य, संयम और विनम्रता से दिया। इससे उनका क्रोध शांत हो गया। इसके विपरीत लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण उत्तरों से विवाद बढ़ा। इसलिए कठिन परिस्थितियों में विनम्रता और मर्यादा अपनाना ही सबसे श्रेष्ठ उपाय है।
प्रश्न-4. ‘हृदयँ न हरषु बिषाद कछु बोले श्रीरघुबीरु।।‘ श्रीराम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यह उनके व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है? उनका भावनात्मक संतुलन इस पूरे पाठ में उन्हें अन्य पात्रों से अलग कैसे स्थापित करता है?
उत्तर- यह पंक्ति श्रीराम के धैर्य, आत्मसंयम, गंभीरता और मर्यादित व्यक्तित्व को दिखाती है। वे हर समय एक-जैसे रहते हैं। परशुराम के क्रोध और लक्ष्मण के तीखे उत्तरों के बीच भी राम शांत, विनम्र और विवेकपूर्ण बने रहते हैं। इसी कारण उन्हें अन्य सभी पात्रों से श्रेष्ठ एवं आदर्श नायक माना जाता है। वे संकट की घड़ी में भी मर्यादा, धैर्य और शिष्टाचार का पालन करते हैं।
| मेरी कल्पना मेरे अनुमान
|
- नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर दीजिए-
प्रश्न-1. कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम जी के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर- मैं राजा जनक की सभा में उपस्थित था। परशुराम क्रोध में आए और शिव-धनुष तोड़ने वाले को ललकारा। लक्ष्मण के निर्भीक उत्तरों से उनका क्रोध बढ़ गया। तब श्रीराम ने विनम्रता और धैर्य से उनसे बातचीत की। अंत में श्रीराम का दिव्य स्वरूप पहचानकर परशुराम का क्रोध शांत हो गया। यह घटना मेरे लिए अविस्मरणीय बन गई।
प्रश्न-2. “अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।। “जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे?
(संकेत- सोचिए, यह मनुष्य के व्यवहार की किस सच्चाई को उजागर करता है?)
उत्तर- अन्य राजा स्वयं शिव-धनुष नहीं उठा पाए थे, जिससे उन्हें अपमान और ईर्ष्या हुई। इसलिए जब राजा जनक परशुराम के क्रोध के कारण मौन रहे, तब वे भीतर ही भीतर प्रसन्न हुए। यह प्रसंग मनुष्य की उस सच्चाई को प्रकट करता है कि ईर्ष्यालु और स्वार्थी व्यक्ति दूसरों को मुसीबत में देखकर मन ही मन खुश होते हैं, जबकि सज्जन लोग ऐसा नहीं करते।
| विषयों से संवाद |
प्रश्न-1. सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से उनकी विनम्रता, मर्यादा, धीरता और उदात्त चरित्र का पता चलता है, जो किसी भी कुशल शासक के लिए आवश्यक है। आपको किन-किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है? चर्चा कीजिए और लिखिए।
उत्तर- दैनिक जीवन में विद्यालय, परिवार, मित्रों तथा कठिन परिस्थितियों में हमें विनम्रता, मर्यादा, धैर्य और उदारता का परिचय देना चाहिए। क्रोध और अहंकार के बजाय संयम तथा शिष्ट व्यवहार अपनाने से विवाद आसानी से सुलझ जाते हैं। श्रीराम का आदर्श हमें सिखाता है कि महानता शक्ति से नहीं, बल्कि अच्छे आचरण और मर्यादा से प्राप्त होती है।
प्रश्न-2. कविता में वर्णित प्रसंग सीता स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर-चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक-ऐतिहासिक घटना/प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।
उत्तर- द्रौपदी का स्वयंवर प्राचीन भारतीय समाज की प्रसिद्ध परंपरा का उदाहरण है। राजा द्रुपद ने स्वयंवर आयोजित किया, जिसमें अनेक राजा और राजकुमार आए। शर्त थी कि जल में प्रतिबिंब देखकर घूमती मछली की आँख भेदनी होगी। सभी असफल रहे, पर अर्जुन ने लक्ष्य भेद दिया। तब द्रौपदी ने उन्हें अपना वर चुना।
| सृजन |
प्रश्न-1. परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना दोनों चिंतित हैं और सीता के लिए एक-एक पल युग के समान भारी और लंबा प्रतीत हो रहा है। उनकी मनःस्थिति का अनुमान लगाते हुए उस क्षण दोनों के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।
उत्तर- सुनयना (मन ही मन)- पुत्री, धैर्य रखो। सब ठीक होगा।
सीता (मन ही मन)- माता, मुझे बहुत चिंता हो रही है।
सुनयना- श्रीराम पर विश्वास रखो।
सीता- मुझे उनके धैर्य पर भरोसा है।
सुनयना- सत्य की हमेशा जीत होती है।
सीता- अब मेरा मन शांत हो गया है।
सुनयना- यह संकट शीघ्र टल जाएगा।
सीता- हाँ माता, मुझे भी यही विश्वास है।
प्रश्न-2. सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर- सभा में बैठी मैं परशुराम के क्रोध से बहुत चिंतित थी। लक्ष्मण के साहस पर गर्व हुआ, पर उनके तीखे उत्तरों से भय भी लगा कि कहीं विवाद न बढ़ जाए। जब श्रीराम ने धैर्य, विनम्रता और मर्यादा से परशुराम को शांत किया, तब मुझे बहुत राहत और प्रसन्नता हुई। उनके महान गुणों के प्रति मेरा सम्मान और बढ़ गया।
प्रश्न-3. कविता में सभा में उपस्थित राजाओं ने अपनी वीरता, पराक्रम आदि का उल्लेख करते हुए अपना परिचय दिया है। यदि आपको अपना परिचय देना हो तो आप अपना परिचय किस प्रकार देना उचित समझेंगे? अपना परिचय देते हुए कुछ वाक्य लिखिए जिससे आपके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण बातों का पता चलता हो।
उत्तर- मेरा नाम अजीत भारती है। मैं एक परिश्रमी, अनुशासित और ईमानदार विद्यार्थी हूँ। मुझे हिंदी साहित्य का अध्ययन और अध्यापन करना बहुत पसंद है। मैं हमेशा नई बातें सीखने और दूसरों की सहायता करने कोशिश करता हूँ। मेरा उद्देश्य ज्ञान अर्जित करना तथा समाज में शिक्षा के माध्यम से सकारात्मक योगदान देना है।
25 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित
प्रश्न-1. सभा में भयंकर वेश धारण करके कौन आए?
(A) विश्वामित्र (B) परशुराम
(C) जनक (D) दशरथ
उत्तर – (B) परशुराम
प्रश्न-2. परशुराम को देखकर सभा में उपस्थित लोग कैसे हो गए?
(A) प्रसन्न
(B) क्रोधित
(C) भयभीत
(D) उत्साहित
उत्तर – (C) भयभीत
प्रश्न-3. सभी राजाओं ने परशुराम को क्या किया?
(A) स्वागत किया
(B) दंडवत प्रणाम किया
(C) उपहार दिया
(D) युद्ध किया
उत्तर – (B) दंडवत प्रणाम किया
प्रश्न-4. राजा जनक ने परशुराम के सामने किसे बुलाकर प्रणाम कराया?
(A) राम को
(B) लक्ष्मण को
(C) सीता को
(D) विश्वामित्र को
उत्तर – (C) सीता को
प्रश्न-5. परशुराम ने सीता को क्या दिया?
(A) धन
(B) आशीर्वाद
(C) धनुष
(D) पुष्पमाला
उत्तर – (B) आशीर्वाद
प्रश्न-6. विश्वामित्र किससे परशुराम की भेंट कराते हैं?
(A) जनक से
(B) भरत से
(C) राम और लक्ष्मण से
(D) शत्रुघ्न से
उत्तर – (C) राम और लक्ष्मण से
प्रश्न-7. ‘परशुराम’ ‘राम’ के किस गुण पर मोहित हो गए?
(A) बल शक्ति पर
(B) रूप सौन्दर्य पर
(C) धन वैभव पर
(D) राजपाठ पर
उत्तर – (B) रूप सौन्दर्य पर
प्रश्न-8. परशुराम ने सबसे पहले किससे प्रश्न किया कि धनुष किसने तोड़ा?
(A) राम से
(B) लक्ष्मण से
(C) जनक से
(D) विश्वामित्र से
उत्तर – (C) जनक से
प्रश्न-9. परशुराम किस धनुष के टूटने से क्रोधित हुए?
(A) विष्णु धनुष के
(B) इंद्र धनुष के
(C) शिव धनुष के
(D) गांडीव के
उत्तर – (C) शिव धनुष के
प्रश्न-10. परशुराम ने राजा जनक को किस प्रकार संबोधित किया?
(A) बुद्धिमान
(B) जड़
(C) धर्मात्मा
(D) वीर
उत्तर – (B) जड़
प्रश्न-11. जनक परशुराम के प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दे सके?
(A) उन्हें पता नहीं था।
(B) वे भयभीत थे।
(C) वे सभा से बाहर चले गए।
(D) वे क्रोधित थे।
उत्तर – (B) वे भयभीत थे।
प्रश्न-12. परशुराम के क्रोध से कौन प्रसन्न हुए?
(A) राम
(B) लक्ष्मण
(C) कुटिल राजा
(D) विश्वामित्र
उत्तर – (C) कुटिल राजा
प्रश्न-13. सीता की माता किस कारण चिंतित थीं?
(A) विवाह रुक जाएगा।
(B) युद्ध होने वाला था।
(C) परशुराम के क्रोध से।
(D) जनक के कारण।
उत्तर – (C) परशुराम के क्रोध से।
प्रश्न-14. परशुराम के क्रोध के समय श्रीराम कैसे रहे?
(A) भयभीत
(B) क्रोधित
(C) शांत और धैर्यवान
(D) उदास
उत्तर – (C) शांत और धैर्यवान
प्रश्न-15. श्रीराम ने स्वयं को परशुराम का क्या बताया?
(A) मित्र
(B) सेवक
(C) शिष्य
(D) भाई
उत्तर – (B) सेवक
प्रश्न-16. परशुराम के अनुसार सेवक का कर्तव्य क्या है?
(A) सेवा करना
(B) युद्ध करना
(C) राज्य करना
(D) धन कमाना
उत्तर – (A) सेवा करना
प्रश्न-17. परशुराम ने शिव धनुष तोड़ने वाले की तुलना किससे की?
(A) रावण से
(B) सहस्रबाहु से
(C) विभीषण से
(D) बाली से
उत्तर – (B) सहस्रबाहु से
प्रश्न-18. परशुराम ने शिव धनुष तोड़ने वाले को क्या कहा?
(A) मित्र
(B) शिष्य
(C) शत्रु
(D) राजा
उत्तर – (C) शत्रु
प्रश्न-19. परशुराम की बातें सुनकर कौन मुस्कराए?
(A) राम
(B) जनक
(C) लक्ष्मण
(D) विश्वामित्र
उत्तर – (C) लक्ष्मण
प्रश्न-20. लक्ष्मण ने बचपन में क्या करने की बात कही?
(A) अनेक धनुष तोड़ने की
(B) युद्ध जीतने की
(C) तप करने की
(D) धनुष बनाने की
उत्तर – (A) अनेक धनुष तोड़ने की
प्रश्न-21. लक्ष्मण ने परशुराम से किस भाव में बातें कीं?
(A) विनम्रता से
(B) व्यंग्य और अवमानना से
(C) भय से
(D) प्रेम से
उत्तर – (B) व्यंग्य और अवमानना से
प्रश्न-22. ‘येहि धनु पर ममता केहि हेतू‘ किसने कहा?
(A) राम ने
(B) जनक ने
(C) लक्ष्मण ने
(D) विश्वामित्र ने
उत्तर – (C) लक्ष्मण ने
प्रश्न-23. परशुराम ने लक्ष्मण को किस नाम से संबोधित किया?
(A) वीर बालक
(B) नृपबालक
(C) तपस्वी
(D) राजकुमार
उत्तर – (B) नृपबालक
प्रश्न-24. त्रिपुरारि किसका नाम है?
(A) विष्णु
(B) ब्रह्मा
(C) शिव
(D) इंद्र
उत्तर – (C) शिव
प्रश्न-25. इस प्रसंग का मुख्य संदेश क्या है?
(A) अहंकार करना चाहिए।
(B) क्रोध ही सबसे बड़ा बल है।
(C) विनम्रता, धैर्य और मर्यादा से संकट का समाधान होता है।
(D) केवल बल ही श्रेष्ठ है।
उत्तर – (C) विनम्रता, धैर्य और मर्यादा से संकट का समाधान होता है।
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डॉ. अजीत भारती
ररम लक्ष्मण परशुराम संवाद- http://glishchatterbox.com/chapter/ram-lakshman-parshuram-samvaad-class-9-ganga-hindi-chapter-9