मानवीकरण अलंकार
मानवीकरण अलंकार के 20 उदाहरण? “मानवीकरण अलंकार वह अलंकार है जिसमें प्रकृति, वस्तुओं, पशु-पक्षियों, अमूर्त भावों अथवा निर्जीव तत्वों को मनुष्य की तरह व्यवहार या मनुष्य की तरह क्रिया कलाप कराते दिखया जाता है “। तब वह मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करता है। इस अलंकार में निर्जीव तत्व मानो जीवन प्राप्त कर लेते हैं-वे हँसते हैं, बोलते हैं, रोते हैं, चलते हैं, पुकारते हैं, मुस्कुराते हैं और मनुष्य की भाँति व्यवहार करते हैं।
मानवीकरण का उद्देश्य केवल सौंदर्य-प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि पाठक के मन में सजीवता, अपनापन और भावात्मक गहराई उत्पन्न करना भी होता है।
जब कवि लिखता है कि “हवाएँ गाती हैं”, तो वास्तव में हवा तो गा नहीं सकती, परंतु इस प्रयोग से दृश्य अधिक सुन्दर बन जाता है और प्रकृति एक मित्र की तरह रख-रखाव करती दिखाई देती है। पाठक को एक आत्मीय अनुभूति होती है।
संक्षेप में, मानवीकरण अलंकार उस अद्भुत कलात्मक शक्ति का नाम है जिससे कवि निर्जीव को जीवंत बना देता है, और पाठक संसार को नए, भावपूर्ण और कल्पनाशील दृष्टिकोण से देखने लगता है। यह अलंकार साहित्य की अभिव्यक्ति को ऊँचाई और संवेदनशीलता प्रदान करता है।
मानवीकरण की परिभाषा- जिस कविता में प्रकृति या निर्जीव वस्तुओं को मनुष्य की तरह काम करते हुए दिखया जाता है, तो उसे मानवीकरण अलंकार कहते हैं ।
मानवीकरण अलंकार के 20 उदाहरण
पार्ट-1.
- मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।
स्पष्टीकरण-इस पंक्ति मेघों को मनुष्य की तरह सजने-संवरने वाला बताया गया है।
- बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की।
स्पष्टीकरण- उक्त पंक्ति पेड़ को मनुष्य की तरह प्रणाम करने वाला माना गया है।
- कलियाँ दरवाज़े खोल-खोल झुरमुट में मुस्काती हैं।
स्पष्टीकरण- कलियों को मनुष्य की तरह मुस्कुराने वाला कहा गया है।
- अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा-नागरी।
स्पष्टीकरण- उषा को स्त्री की तरह कार्य करती हुई दिखाया गया है।
- उषा सुनहरे तीर बरसाती, जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।
स्पष्टीकरण- उषा को मनुष्य की तरह तीर बरसाने और उदित होने का रूप दिया गया है।
- यह ज़मीन गा रही है, आसमान गा रहा है।
स्पष्टीकरण- जमीन और आसमान को गाने वाला (मानव-कर्म) बताया गया है।
- गाड़ी बुला रही है, सिटी बजा रही है।
स्पष्टीकरण- गाड़ी को मनुष्य की तरह बुलाने वाली कहा गया है।
- चंदा रे चंदा रे, कभी तो ज़मीं पे आ बैठेंगे…
स्पष्टीकरण- चाँद को मनुष्य की तरह बात करने-बैठने वाला समझा गया है।
- तारे भी यहाँ मटक-मटक कर हँस रहे हैं।
स्पष्टीकरण- तारों को मनुष्य की तरह हँसते-मटकते दिखाया गया है।
पार्ट-2.
- हवाएँ गाती हैं और नाचती हैं।
स्पष्टीकरण- हवाओं को मनुष्य की तरह गाने और नाचने वाला माना गया है।
- सुबह का सूरज अपनी सुनहरी बाहें फैला रहा है।
स्पष्टीकरण- सूर्य को मनुष्य की तरह बाहें फैलाने वाला बताया गया है।
- यह लैपटॉप चालू होने से इनकार कर रहा था।
स्पष्टीकरण- लैपटॉप को मनुष्य की तरह इच्छाशक्ति वाला दिखाया गया है।
- उसने सूरज को पहाड़ियों के ऊपर से झाँकते हुए देखा।
स्पष्टीकरण- सूरज को झाँकने जैसा मानव-कर्म दिया गया है।
- अवसर ने उसके दरवाजे पर दस्तक दी।
स्पष्टीकरण- अवसर को मनुष्य की तरह दरवाज़ा खटखटाने वाला कहा गया है।
- पुस्तक ने फिर से पढ़े जाने की भीख माँगी।
स्पष्टीकरण- पुस्तक को मनुष्य की तरह भीख माँगने वाला बनाया गया है।
- क्रोधित बादल आकाश में मार्च कर रहे थे।
स्पष्टीकरण- बादलों को सैनिकों की तरह क्रोधित होकर मार्च करते दिखाया गया है।
- चाँदनी रात हँस रही है।
स्पष्टीकरण- रात्रि को मनुष्य की तरह हँसते हुए दिखाया गया है।
- फूल हँसे, कलियाँ मुस्काईं।
स्पष्टीकरण- फूल और कलियों को मनुष्य की तरह हँसाया-मुस्कुराया गया है।
- मैंने पूछा चाँद से, बताया चाँद ने।
स्पष्टीकरण- चाँद को मनुष्य की तरह उत्तर देने वाला बनाया गया है।
- रात के आकाश में तारे चंचलता से झपकाते हैं।
स्पष्टीकरण- तारों को मनुष्य की तरह चंचलता से आँखें झपकाने वाला बताया गया है।
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अलंकार