श्लेष अलंकार के 100 उदहारण
श्लेष अलंकार के 100 उदहारण? जब किसी शब्द का प्रयोग एक ही बार किया जाए, लेकिन उससे एक से अधिक अर्थ निकलें और वे सभी अर्थ प्रसंग के अनुसार उचित लगें, तब वहाँ श्लेष अलंकार होता है।अर्थात् एक शब्द – अनेक अर्थ, यही श्लेष की विशेषता है।
मुख्य बात
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शब्द एक होता है।
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अर्थ दो या अधिक होते हैं।
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सभी अर्थ संदर्भ में सार्थक होते हैं।
प्रश्न-1.श्लेष अलंकार किसे कहते हैं ।
उत्तर-श्लेष अक अर्थ है चिपकना अर्थात् एक शब्द में कई अर्थ चिपके होते हैं बस उन्हें निकालना रहता है।
प्रश्न-2. श्लेष अलंकार की परिभाषा सहित उदाहरण लिखिए?
उत्तर- श्लेष अलंकार की परिभाषा- जिस कविता में कोई शब्द एक बार आये और उसके अर्थ एक से अधिक निकलें तो उसे श्लेष अलंकार कहते हैं।
अथवा
“जहाँ एक शब्द का प्रयोग एक बार किया जाता है, लेकिन उसके अर्थ एक से अधिक निकलते हैं, उसे श्लेष अलंकार कहते हैं। “
1.उदाहरण-
“मंगत को देखि पट डेट बार-बार “
स्पष्टीकरण- इस पंक्ति में ‘पट’ के दो अर्थ हैं-वस्त्र और किवाड़ (दरवाजा)।
2.उदाहरण-
“मधुबन की छाती को देखो,
सुखी कितनी इसकी कलियाँ”
स्पष्टीकरण- 1.फूल खिलने पहले की दशा
2.यौवन से पहले की अवस्था
3.उदाहरण-
“चरन धरत चिंता करत, चितवत चारहु ओर ।
सुबरन को ढूंढत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर।
स्पष्टीकरण-यहाँ ‘सुबरन’ शब्द एक बार आया है लेकिन उसके तीन अर्थ हैं-
1.कवि सुंदर वर्ण/अक्षर खोजता है ।
2.व्यभिचारी सुंदर स्त्री खोजता है।
3.चोर स्वर्ण(सोना) खोजता हैं।
4.उदाहरण-
“मेरी भव-बाधा हरो, राधा नागिर सोई।
जा तन की झॉंई परै, स्यामु हरित दुति होय।
स्पष्टीकरण- यहाँ पर स्याम शब्द के कई अर्थ हैं- श्रीकृष्ण, कला/गहरा नीला।
5.उदाहरण-
“बड़े न हूजे गुनन बिनु, बिरद बड़ाई पाइ ।
बारे उजियारो लगे, बढ़े अंधेरो होय”।
स्पष्टीकरण- यहाँ पर ‘कनक’ शब्द के दो अर्थ हैं- सोना और धतूरा
6.उदाहरण-
स्पष्टीकरण- यहाँ पर ‘दीपक’ और ‘कुपुत्र’ की समानता बताई गई है।
‘बारे’ औए ‘बढे’ एक ही बार आया है। परन्तु दो-दो अर्थ दे रहे हैं ।
1. बारे- जलाने, बचपन ।
2. बढ़े- बुझना, बड़ा ।
कार्य जारी है उदाहरण समय रहते लिख दिए जायेंगे ……..
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