अलंकार की परिभाषा
अलंकार की परिभाषा? हिंदी कविता में कवि उसको सजाने के लिए अलंकार का प्रयोग करते हैं ।
प्रश्न-1. अलंकार की परिभाषा एवं प्रकार के साथ उदाहरण भी लिखिए ।
उत्तर-जिस प्रकार किसी स्त्री की शोभा आभूषणों से बढ़ जाती है, उसी प्रकार अलंकारों से काव्य की सुन्दरता बढ़ जाती है स्पष्ट है कि अलंकारों से काव्य की शोभा उत्पन्न नहीं होती, केवल बढ़ती है ।
अलंकार परिभाषा- काव्य की शोभा बढाने वाले कारक, गुण, धर्म या तत्व को अलंकार कहते हैं।
अथवा
काव्य की शोभा बढाने वाले तत्व अलंकार कहे जाते हैं|
उदाहरण :-“चारू चन्द्र की चंचल किरणें;
खेल रहीं हैं जल – थल में |”
स्पष्टीकरण:- कवि यहाँ पर चारू के स्थान पर चतुर, चन्द्र के स्थान पर चाँद या चंद्रमा, चंचल के स्थान पर हलचल लिख सकताथालेकिन उसने ऐसा नहीं किया, कवि ने कविता को सुन्दर – सुन्दर शब्दों से सजाया है | कवि का शब्दों के द्वारा सजाना ही अलंकार कहलाता है|
प्रश्न-अलंकार का शाब्दिक अर्थ लिखिए ।
उत्तर-अलंकार का शाब्दिक अर्थ है-
1-सजावट
2-श्रृंगार
3-आभूषण
4-गहना आदि |
प्रश्न-अलंकार कितने शब्दों से मिलकर बना है?
उत्तर- अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना है–
अलम् + कार= अलंकार
‘अलम्’ का अर्थ –भूषित
‘कार’ का अर्थ – करने वाला
‘अलंकरोति इति अलंकार:’ अर्थात् जो अलंकृत (सुशोभित) करे, उसे अलंकार कहते हैं |
अथवा
दंडी के अनुसार:–“काव्य शोभा करान् धर्मान् अलंकरान् प्रचक्षते”
अर्थात् काव्य के शोभा कारक धर्म अलंकार कहलाते हैं |
प्रश्न- अलंकार के कितने प्रकार या भेद हैं ?
उत्तर- अलंकार के दो भेद या प्रकार हैं –
1-शब्दालंकार
2- अर्थालंकार
शब्दालंकार:- जो शब्द पर आधारित होते हैं, उन्हें शब्दालंकार कहते हैं |
जैसे-अनुप्रास, यमक, श्लेष, पुनरुक्ति,वक्रोक्ति|
अर्थालंकार:- जहाँ केवल शब्द में (शब्द के अर्थ में )अलंकार होता है |
जैसे-उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, प्रतीप, व्यतिरेक, अतिशयोक्ति, अन्योक्ति, विभावना, भ्रांतिमान आदि हैं |