रैदास के पद

रैदास के पद क्या है ? इसमें सम्पूर्ण चैप्टर 

Class-9 विषय-हिंदी पुस्तक गंगा

पाठ-8.रैदास के पद

कवि रैदास का परिचय

जन्म-    सन् 1388 ई.

स्थान- काशी (वाराणसी)

रचनाएँ-  रैदास की बानी, पद

निधन-  सन् 1518 ई.

रैदास के पद पाठ का सार 

इस चैप्टर में संत कवि रैदास ने ईश्वर के प्रति दास्य भाव, भक्ति, अपने मजबूत प्रेम और समर्पण की भावना से परिचय कराया है। उन्होंने सच्ची प्रेम, विनम्रता और अध्यात्मिक मूल्यों को बताया है। सच्ची भक्ति के लिए बाहरी दिखावा करने की कोई जरुरत नहीं है।

पहला पद

रैदास जी कहते हैं कि मेरे मन में राम नाम की रट लग गई है। मैं हमेशा उनका ही नाम लेता रहता हूँ। अब मैं तुम्हारा भक्त हो गया हूँ। अब वह रट कैसे छूटेगी।  

हे प्रभु तुम चंदन की तरह हो और मैं पानी की तरह। जिस प्रकार से चंदन और पानी के मिलने उसकी खुशबू पानी में फ़ैल जाती है। ठीक उसी तरह से मेरे शरीर में तुम्हारे प्रेम की सुगंध समा गई है।

हे प्रभु तुम बादल की तरह और मैं मोर की तरह हूँ जैसे बादल को देखकर मोर नाचने लगता है ठीक वैसा ही हाल मेरा आपके दर्शन होने पर हुआ है।

तुम चाँद की तरह और मैं चकोर की तरह हूँ। जैसे चाँद का प्रेम पाने के लिए चकोर उसे रात भर देखता रहता है, ठीक वैसे मैं आपका प्रेम पाने के लिए भटकता रहता हूँ

हे प्रभु तुम दीपक की तरह और मैं दिया बाती की तरह हूँ। जिस प्रकार से बाती दिया में जलती रहती है वैसे ही मैं तुम्हारे प्रेम में हमेशा जलता रहता हूँ। अर्थात् तुम्हारा प्रेम पाने के लिए सदैव तड़पता रहता हूँ।

प्रभु जी तुम मोती की तरह और मैं धागे की तरह हूँ, मैं मोती पिरोने वाले धागे की तरह हूँ। मेरा धागा रूपी मन मोती रूपी ईश्वर से जुड़ा रहना चाहता है। जिस प्रकार से सोना, सुहागा से मिलने पर सोने का महत्व बढ़ जाता है। उसी प्रकार तुम्हारे सम्पर्क में आने पर मेरी कीमत बढ़ गई है।

हे प्रभु तुम मालिक की तरह और मैं दास की तरह हूँ। मैं आपके आदेश का पालन करना अपना धर्म मानता हूँ मैं आपकी भक्ति दास की तरह करता हूँ। संत कवि रैदास स्वयं को ईश्वर का दास मानते हैं।

दूसरा पद

रैदास जी कहते हैं कि हे प्रभु अगर आप मुझसे रिश्ता तोड़ भी लें तो भी मैं आपसे नाता तोड़कर अलग नहीं हो रह सकता। अगर मैंने आपसे रिश्ता तोड़ लिया तो फिर मैं किसके पास जाऊँगा क्योंकि मेरे लिए तुम्हारे सिवाय कोई नहीं है।

आगे कवि कहते हैं कि मैं तीर्थयात्रा और व्रत में विश्वास नहीं करता हूँ न ही मुझे उसकी जरुरत है और न ही इसमें मुझे कोई संदेह है। मुझे तो केवल तुम्हारे कमल के समान चरणों पर ही भरोसा है।

मैं जहाँ-जहाँ भी जाता हूँ तुम्हारी ही पूजा करता  हूँ। तुम्हारे जैसा संसार में कोई दूसरा देवता नहीं है।

 मैंने अपना पूरा मन ईश्वर से जोड़ लिया और संसार से नाता तोड़ लिया है अर्थात् अब मेरा ईश्वर में मन लग गया और संसार के मोह-माया को पूरी तरह से त्याग दिया है।

अंत में संत रैदास जी कहते हैं कि मन, कर्म, और वचन से दिन-रात केवल तुम्हारा ही नाम लेता रहता हूँ। अब मैं पूरी तरह से आपकी भक्ति में लीन हो गया हूँ।

(अभ्यास/प्रश्न-उत्तर)

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उयुक्त लगते हैं ?

प्रश्न-1.‘अब कैसे छुटै राम रट लागीपंक्ति का भाव है

()  नाम उच्चारण की कठिनाई

()  नाम रटकर याद करना

()  आराध्य का नाम जपना

 (घ) मित्रों का नाम रटना

उत्तर-(ग) आराध्य का नाम जपना

उपयुक्त कारणराम रट लागी का अर्थ हैलगातार प्रभु का नाम लेना। जो भक्त के जीवन की आदत बन गई है।

प्रश्न-2.प्रभु जी तुम चंदन हम पानीपंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है ?

()  एकाकार और समरूप

 (ख) तरल और तीव्र सुगंध

()  आश्रय और आश्रित

(घ) द्रव और ठोस

उत्तर- (क) एकाकार और समरूप

उपयुक्त कारण जिस प्रकार चंदन और पानी मिलकर एक हो जाते हैं। ठीक उसी प्रकार से मैं और प्रभु मिलकर एक हो गए हैं।

प्रश्न-3.‘तुम दीपक, हम बातीसे रैदास का क्या भाव है ?

()  दीपक और बाती का कोई मेल नहीं होता है।

 (ख) दीपक बिना बाती भी जल सकती है।

()  भक्त आराध्य से अधिक महत्वपूर्ण है

 (घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को अवलोकित करता है

उत्तर() भक्त का आराध्य से मेल जीवन को अवलोकित करता है

उपयुक्त कारणदीपक और बाती साथ हों तो प्रकाश होता है उअर अँधेरा नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार ईश्वर से जुड़कर भक्त का जीवन प्रकाशित हो जाता है अर्थात् कवि के अंदर अंधकार रूपी बुराई नष्ट हो जाती है।

प्रश्न-4.‘जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ पंक्ति से रैदास का क्या आशय है?

() परोपकारी भक्ति भाव

() आराध्य से अटूट संबंध

() सांसारिक मोह

() कर्मकांड पर बल

उत्तर() आराध्य से अटूट संबंध

उपयुक्त कारण रैदास जी कहते हैं कि प्रभु भले ही उनसे संबंध तोड़ लें लेकिन वे उनकी भक्ति करना बंद नहीं करंगे। वे प्रभु के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं करते हैं।

प्रश्न-5.‘तीरथ बरत करूँ अँदेसा पंक्ति से आप क्या समझते हैं?

() तीर्थ और व्रत आवश्यक नहीं है

() तीर्थ और व्रत सब आवशयक

() तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है

() आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है

उत्तर() आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है

उपयुक्त कारणरैदास जी कहते हैं कि मैं तीर्थयात्रा और व्रत पर विश्वास नहीं करता, मैं तो प्रभु के कमल रूपी चरणों पर ही विश्वास करता हूँ।

प्रश्न-6. सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है ?

() ‘जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा

() ‘जाकी जोति बरै दिन राती

() ‘तुम दीपक, हम बाती

()तीरथ बरत करूँ अंदेसा

उत्तर() जहँ  जहँ जाओ तुम्हरी पूजा

उपयुक्त कारण रैदास जी कहते हैं कि ईश्वर हर जगह पर हैं इसलिय उनकी भक्ति कहीं भी की जा सकती है।

अर्थ और भाव

  • नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए भाव स्पष्ट कीजिए

प्रश्न-() प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चाँद चकोरा

उत्तररैदास जी कहते हैं कि हेप्रभु आप काले बादल हैं तो मैं मोर हूँ, जिस प्रकार से मोर काले बादलों को देखकर नाचने लगता है उसी प्रकार से आपके दर्शन से मैं नाचने लगता हूँ। जिस प्रकार से चकोर पक्षी बिना पलकें बंद किये चाँद को पूरी रात देखता रहता है, उसी प्रकार से मैं भी बिना पलकें झपकाए आपको देखता रहता हूँ।

प्रश्न-() तीरथ बरत करूं अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां

उत्तररैदास जी कहते हैं कि मुझे तीर्थ यात्रा करने या व्रत रखने की कोई चिंता नहीं है। मुझे तो केवल आपके कमल रूपी चरणों पर विश्वास है।

मेरी समझ मेरे विचार

 नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए

प्रश्न-1. जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ पंक्ति में रैदास की अपने आराध्य में अटूट निष्ठा का भाव है। इससे आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।

उत्तर जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ पंक्ति से पता चलता है कि कवि रैदास अपने आराध्य के प्रति बहुत श्रद्धा, विश्वास और भक्ति रखते हैं। वे कहते हैं कि यदि प्रभु उनसे अपना संबंध तोड़ भी लें, तब भी वे उनका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।

प्रश्न-2. रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है ? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?

उत्तररैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर भगवान के चरणों में अटूट विश्वास, सच्ची श्रद्धा और प्रेमपूर्ण भक्ति को भक्ति का मुख्य आधार माना है। उनके अनुसार बाहरी आडंबरों से अधिक महत्व सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करने का है। मेरे विचार से सच्ची श्रद्धा, विश्वास, प्रेम, सेवा, विनम्रता और अच्छे कर्म ही भक्ति के वास्तविक आधार हैं।

प्रश्न-3.दोनों पदों में भक्त और आराध्य के सम्बन्ध को किनकिन प्रतीकों/उपमाओं से व्यक्त किया गया है? लिखिए

उत्तरदोनों पदों में रैदास ने भक्त और प्रभु के संबंध को सुंदर प्रतीकों और उपमाओं द्वारा व्यक्त किया है। उन्होंने प्रभु को चंदन, दीपक, मोती, स्वामी तथा भक्त को पानी, बाती, धागा और सेवक बताया है। इन उपमाओं से स्पष्ट होता है कि भक्त और प्रभु का संबंध प्रेम, विश्वास, समर्पण पर आधारित होता है।

विधा से संवाद

कहानी का सौन्दर्य

प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चाँद चकोर

इस पंक्ति में च’ और त’ वर्ण कई बार आएँ हैं, अतः जिस काव्य पंक्ति में कोई वर्ण कई बार आए तो उसमें अनुप्रास अलंकार होता है।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

शब्दों की बात

प्रश्न-1. पठित पदों में से संज्ञा और सर्वनाम के तीनतीन उदाहरण ढूंढ़कर लिखिए।

उत्तरपठित पदों में से संज्ञा और सर्वनाम के तीनतीन उदाहरण इस प्रकार हैं

() संज्ञा के उदाहरण

1.राम व्यक्तिवाचक संज्ञा

2.चंदन जातिवाचक संज्ञा

3.मोती जातिवाचक संज्ञा

() सर्वनाम के उदाहरण

1.तुम पुरुषवाचक सर्वनाम

2.हम पुरुषवाचक सर्वनाम

3.मैं पुरुषवाचक सर्वनाम

प्रश्न-2.रैदास ने इन दोनों पदों में बहुत से ऐसे शब्द प्रयुक्त हुए हैं जिनके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग होता है। नीचे सूची में दिए गए शब्दों को देखिए। आप या आपके आसपास के लोग इन शब्दों के लिए किन अन्य शब्दों का प्रयोग करते हैं? लिखिए।

उत्तर हमारे आसपास के लोग इन शब्दों के स्थान पर सामान्यतः निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग करते हैं

पद में प्रयुक्त शब्द प्रचलित हिंदी का शब्द
1.मोरा मोर
2.चकोरा चकोर
3.बाती बत्ती
4.राती रात
5.सोनहिं (सोने) सोना
6.तीरथ तीर्थ
7.बरत व्रत

https://youtu.be/qRYGxIeONCQ

25 (MCQs)

प्रश्न 1.

‘राम-नाम’ की लगन लग जाने के बाद कवि किसका निरंतर स्मरण करते हैं?

  • (A) श्रीकृष्ण
  • (B) भगवान राम
  • (C) भगवान शिव
  • (D) श्रीगणेश

उत्तर: (B)


प्रश्न 2.

कवि ने ईश्वर की तुलना किस वस्तु से की है जिससे सुगंध फैलती है?

  • (A) कमल
  • (B) चंदन
  • (C) चाँद
  • (D) सूर्य

उत्तर: (B)


प्रश्न 3.

चंदन के संदर्भ में कवि स्वयं को किसके समान बताते हैं?

  • (A) पुष्प
  • (B) जल
  • (C) वृक्ष
  • (D) दीपक

उत्तर: (B)


प्रश्न 4.

‘अंग-अंग बास समानी’ में ‘बास’ शब्द का सही अर्थ क्या है?

  • (A) निवास
  • (B) सुगंध
  • (C) वस्त्र
  • (D) आभूषण

उत्तर: (B)


प्रश्न 5.

‘प्रभु जी, तुम घन बन, हम मोरा’ में मोरा किस पक्षी का संकेत है?

  • (A) कबूतर
  • (B) हंस
  • (C) मोर
  • (D) तोता

उत्तर: (C)


प्रश्न 6.

चकोर पक्षी किसे निहारने के लिए प्रसिद्ध माना जाता है?

  • (A) सूर्य
  • (B) चंद्रमा
  • (C) बादल
  • (D) तारा

उत्तर: (B)


प्रश्न 7.

‘दीपक और बाती’ के उदाहरण में बाती किसका प्रतीक है?

  • (A) भक्त
  • (B) राजा
  • (C) गुरु
  • (D) संत

उत्तर: (A)


प्रश्न 8.

दीपक और बाती का संबंध किस भावना को व्यक्त करता है?

  • (A) मित्रता
  • (B) गुरु-शिष्य संबंध
  • (C) भगवान और भक्त का अटूट संबंध
  • (D) राजा और प्रजा

उत्तर: (C)


प्रश्न 9.

यदि प्रभु मोती हैं, तो कवि स्वयं को किसके समान मानते हैं?

  • (A) धागा
  • (B) सोना
  • (C) हार
  • (D) चाँदी

उत्तर: (A)


प्रश्न 10.

‘दासा’ शब्द का उचित अर्थ क्या है?

  • (A) सेवक
  • (B) राजा
  • (C) मित्र
  • (D) गुरु

उत्तर: (A)


प्रश्न 11.

रैदास किस प्रकार की भक्ति को श्रेष्ठ मानते हैं?

  • (A) निष्काम भक्ति
  • (B) दिखावटी भक्ति
  • (C) स्वार्थपूर्ण भक्ति
  • (D) भयवश की गई भक्ति

उत्तर: (A)


प्रश्न 12.

‘जो तुम तोरौ राम, मैं नहिं तोरौं’ का आशय क्या है?

  • (A) मैं भी संबंध तोड़ दूँगा।
  • (B) मैं अपना संबंध कभी नहीं तोड़ूँगा।
  • (C) मैं पूजा छोड़ दूँगा।
  • (D) मैं कहीं और चला जाऊँगा।

उत्तर: (B)


प्रश्न 13.

कवि का अटूट विश्वास किस पर है?

  • (A) परिवार
  • (B) मित्र
  • (C) प्रभु के चरण
  • (D) धन

उत्तर: (C)


प्रश्न 14.

रैदास के अनुसार भक्ति के सामने कौन-सी बातें गौण हो जाती हैं?

  • (A) सेवा
  • (B) तीर्थ और व्रत
  • (C) सत्संग
  • (D) ज्ञान

उत्तर: (B)


प्रश्न 15.

कवि के जीवन का सबसे बड़ा सहारा क्या है?

  • (A) धन
  • (B) ज्ञान
  • (C) प्रभु के चरण-कमल
  • (D) परिवार

उत्तर: (C)


प्रश्न 16.

‘जहँ-जहँ जाओ तुम्हारी पूजा’ से क्या अभिप्राय है?

  • (A) भगवान की पूजा हर स्थान पर होती है।
  • (B) केवल मंदिर में पूजा होती है।
  • (C) केवल घर में पूजा होती है।
  • (D) कहीं पूजा नहीं होती।

उत्तर: (A)


प्रश्न 17.

कवि के अनुसार ईश्वर के समान दूसरा कौन है?

  • (A) शिव
  • (B) विष्णु
  • (C) कोई नहीं
  • (D) ब्रह्मा

उत्तर: (C)


प्रश्न 18.

‘मैं अपनो मन हरि से जोरौ’ का भाव क्या है?

  • (A) मन को संसार से जोड़ना
  • (B) मन को भगवान से जोड़ना
  • (C) मन को धन से जोड़ना
  • (D) मन को मित्रों से जोड़ना

उत्तर: (B)


प्रश्न 19.

ईश्वर से जुड़ने के बाद कवि किससे विरक्त हो जाते हैं?

  • (A) परिवार
  • (B) संसार
  • (C) मित्र
  • (D) गुरु

उत्तर: (B)


प्रश्न 20.

‘सबही पहर तुम्हरी आसा’ का तात्पर्य क्या है?

  • (A) केवल सुबह स्मरण करना
  • (B) केवल रात में स्मरण करना
  • (C) हर समय प्रभु पर भरोसा रखना
  • (D) कभी-कभी स्मरण करना

उत्तर: (C)


प्रश्न 21.

‘जैसे चितवत चंद चकोरा’ में प्रयुक्त अलंकार कौन-सा है?

  • (A) उपमा
  • (B) अनुप्रास
  • (C) यमक
  • (D) श्लेष

उत्तर: (A)


प्रश्न 22.

‘अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी’ पद के रचयिता कौन हैं?

  • (A) कबीरदास
  • (B) सूरदास
  • (C) रैदास
  • (D) तुलसीदास

उत्तर: (C)


प्रश्न 23.

रैदास किस भक्ति परंपरा के प्रमुख संत माने जाते हैं?

  • (A) सगुण भक्ति
  • (B) निर्गुण भक्ति
  • (C) रीतिकाल
  • (D) छायावाद

उत्तर: (B)


प्रश्न 24.

रैदास के पदों का केंद्रीय संदेश क्या है?

  • (A) वीरता का वर्णन
  • (B) प्रकृति का चित्रण
  • (C) ईश्वर के प्रति समर्पित प्रेम और भक्ति
  • (D) राष्ट्रप्रेम

उत्तर: (C)


प्रश्न 25.

रैदास के पद हमें कौन-सी प्रमुख शिक्षा देते हैं?

  • (A) धन-संपत्ति सबसे महत्वपूर्ण है।
  • (B) केवल तीर्थयात्रा ही मोक्ष का मार्ग है।
  • (C) सच्ची भक्ति, पूर्ण समर्पण और ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • (D) केवल बाहरी पूजा ही पर्याप्त है।

उत्तर: (C)

====x====x====x=====x=डॉ. अजीत भारती 

By hindi Bharti

Dr.Ajeet Bhartee M.A.hindi M.phile (hindi) P.hd.(hindi) CTET

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