मेरी भी आभा है इसमें

मेरी भी आभा है इसमें? इस कविता में कवि ने बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति का अपने देश के प्रति प्रेम और कर्तव्य होते हैं । किसी देश को सुखी, समृद्धि, खुशहाल और विकसित करने में सभी देशवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कवि कहते हैं देश की प्रगति और खुशहाली में मेरा भी योगदान है । पूरे भूखंड पर चारो ओर फैली हरियाली और फूलों से निकलने वाली धीमी-धीमी खुशबू  और पेड़-पौधों की सेवा और सुरक्षा में मेरा भी योगदान है ।

बातचीत के लिए

(सरल भाषा में सारांश)

“मेरी भी आभा है इसमें” कविता में कवि नागार्जुन ने अपने गाँव, प्रकृति, श्रम और मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम व्यक्त किया है।

कवि अपने गाँव की सुंदरता, हरियाली और विकास को देखकर बहुत खुश होते हैं।

वे कहते हैं कि गाँव में सुबह उगता सूरज, बहती हुई नदी, हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल, लहलहाती फसलें और चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता केवल प्रकृति की देन नहीं है, बल्कि इसमें मेहनती लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

कवि कहते हैं कि उन्होंने अपनी मेहनत, प्रेम और जीवन का हर क्षण इस धरती को सँवारने में लगाया है।

उन्होंने अपने पसीने और परिश्रम से खेतों को उपजाऊ बनाया, पौधों और पेड़ों की देखभाल की तथा गाँव के विकास में अपना योगदान दिया।

इसलिए जब वे गाँव की समृद्धि और सुंदरता देखते हैं, तो गर्व से कहते हैं कि “मेरी भी आभा है इसमें।”

कवि आगे बताते हैं कि उनके शरीर की प्रत्येक रक्त की बूंद इस मिट्टी से जुड़ी हुई है। उन्होंने अपने जीवन की शक्ति इस धरती को समर्पित की है।

यही कारण है कि गाँव की हर उपलब्धि और हर सुंदर दृश्य उन्हें अपना-सा लगता है।

यह कविता केवल कवि की भावना नहीं, बल्कि उन सभी किसानों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों का सम्मान है, जिनकी मेहनत से देश आगे बढ़ता है।

  यह कविता हमें सिखाती है कि हमें अपने देश, गाँव, प्रकृति और श्रम का आदर करना चाहिए।

जब हम ईमानदारी और मेहनत से काम करते हैं, तब हम भी गर्व से कह सकते हैं कि हमारे देश और समाज के विकास में “मेरी भी आभा है इसमें।”

यह कविता देशप्रेम, कर्म, आत्मगौरव और प्रकृति के प्रति प्रेम की प्रेरणा देती है।

(सरल भाषा में कविता की व्याख्या)

1.नए ग्राम में नया सूर्य जो चमक रहा है।

अर्थ नए गाँव में नया सूरज चमक रहा है।

भावार्थ: गाँव में नई आशा, नई ऊर्जा और विकास का वातावरण दिखाई दे रहा है।

 

2.यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है।

 अर्थ: यह विशाल धरती आज चमक रही है। भावार्थ: देश और गाँव की उन्नति तथा समृद्धि सबके परिश्रम का परिणाम है।

 

 3.मेरी भी आभा है इसमें।

 अर्थ: इस चमक और सुंदरता में मेरा भी योगदान है।

भावार्थ: कवि अपने श्रम और योगदान पर गर्व व्यक्त करते हैं।

 

4.भीनी-भीनी खुशबू वाले रंग-बिरंगे।

 अर्थ: सुगंध से भरे रंग-बिरंगे फूल हैं।

भावार्थ: धरती पर रंग-बिरंगे सुंदर फूल खिले हुए हैं जिनमें से हल्की-हल्की खुशबू आ रही है।

 

5.यह जो इतने फूल खिले हैं।

 अर्थ: इतने सुंदर फूल खिले हुए हैं।

भावार्थ: प्रकृति की सुंदरता मेहनत और देखभाल का परिणाम है।

 

6.कल इनको मेरे प्राणों ने नहलाया था।

 अर्थ: मैंने अपने प्रेम और परिश्रम से इनकी सेवा की थी।

भावार्थ: कवि ने पूरे मन से प्रकृति की रक्षा और देखभाल की है।

 

7.कल इनको मेरे सपनों ने सहलाया था।

 अर्थ: मैंने इनके सुंदर भविष्य के सपने देखे थे।

भावार्थ: विकास पहले सपनों में जन्म लेता है, फिर वास्तविकता बनता है।

 

 8.मेरी भी आभा है इसमें।

अर्थ: इसमें मेरा भी योगदान है।

भावार्थ: कवि अपने श्रम और समर्पण पर गर्व करते हैं।

 

9.पकी सुनहली फसलों से जो।

अर्थ: खेतों में सुनहरी पकी हुई फसलें लहलहा रही हैं।

भावार्थ: किसानों की मेहनत का सुंदर परिणाम सामने है।

 

10.अबकी यह खलिहान भर गया।

 अर्थ: इस बार खलिहान अनाज से भर गया है।

भावार्थ: अच्छी फसल से खुशहाली और समृद्धि आई है।

 

11.मेरी रग-रग के शोणित की बूँद इसमें मुस्काती है।

 अर्थ: मेरे खून-पसीने की हर बूँद इसमें शामिल है।

भावार्थ: यह समृद्धि कवि और मेहनतकश लोगों के कठिन परिश्रम का फल है।

 

12.नए ग्राम में नया सूर्य जो चमक रहा है।

 अर्थ: गाँव में नई रोशनी और नई शुरुआत दिखाई दे रही है।

भावार्थ: गाँव निरंतर प्रगति और विकास की ओर बढ़ रहा है।

 

13.यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है।

 अर्थ: यह धरती आज सुंदर और समृद्ध दिखाई दे रही है।

भावार्थ: देश की उन्नति में प्रत्येक नागरिक का योगदान होता है।

 

14.मेरी भी आभा है इसमें।

 अर्थ: इस विकास और सुंदरता में मेरा भी हिस्सा है।

भावार्थ: कविता का मुख्य संदेश है कि हर व्यक्ति को अपनी मेहनत, देश और समाज पर गर्व होना चाहिए तथा राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देना चाहिए।

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(प्रश्न और उत्तर/अभ्यास कार्य )

प्रश्न–1. इस कविता को सुनकर या पढ़कर आपके मन में सबसे पहले क्या विचार आया?

उत्तर- इस कविता को पढ़कर मेरे मन में परिश्रम, आत्मविश्वास और अपने गाँव तथा देश के विकास का विचार आया। इससे प्रेरणा मिलती है कि प्रत्येक व्यक्ति की मेहनत और योगदान से समाज सुंदर और खुशहाल बनता है।

प्रश्न–2. क्या आपका भी कोई ऐसा सपना है जिसे आप पूरा करना चाहते हैं?

उत्तर- हाँ, मेरा सपना है कि मैं अच्छी शिक्षा प्राप्त करके एक सफल, ईमानदार और जागरूक नागरिक बनूँ। अपने ज्ञान और परिश्रम के बल पर समाज की सेवा करूँ और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दूँ।

प्रश्न–3. आपको आकाश किस मौसम में सबसे अच्छा लगता है? आप उसमें क्या-क्या देखते हैं?

उत्तर- मुझे वर्षा ऋतु के बाद का साफ और नीला आकाश सबसे अच्छा लगता है। उसमें सफेद बादल, सात रंगों का इंद्रधनुष, उड़ते पक्षी, चमकता सूर्य और रात में टिमटिमाते तारे देखकर मन प्रसन्न हो जाता है।

मेरी समझ से-

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए।

1.”मेरी भी आभा है इसमें” पंक्ति में ‘आभा’ शब्द का भाव है-

   (क) तेज             (ग) योगदान

   (ख) चमक            (घ) श्रम

 2.फूलों के सौंदर्य के पीछे किसका प्रमुख योगदान है?

   (क) प्रकृति का         (ख) माली का

   (ग) पानी का          (घ) किसान का

 3.कविता का मुख्य संदेश क्या है?

   (क) प्रकृति का सौंदर्य सबसे महत्वपूर्ण है।

   (ख) सफलता केवल भाग्य से मिलती है।

   (ग) राष्ट्र की प्रगति में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान होता है।

   (घ) फूल और फसलें जीवन का आधार हैं।

 4.कथन- खलिहान पकी सुनहली फसलों से भर गया है।

कारण- इसके लिए किसान ने अथक परिश्रम किया है।

    (क) कथन सही है, किंतु कारण गलत है।

    (ख) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।

    (ग) कथन और कारण, दोनों गलत हैं।

   (घ) कथन और कारण, दोनों सही हैं।

सोचिये और लिखिए-

1.कवि “मेरी भी आभा है इसमें” कहकर किस भावना को व्यक्त करना चाहता है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर- कवि कहना चाहता है कि फसलें उसके कठिन परिश्रम, पसीने और त्याग का परिणाम हैं। उसने दिन-रात मेहनत की है, इसलिए सुनहरी फसलों में उसे अपनी मेहनत और जीवन का प्रतिबिंब दिखाई देता है।

 2.कवि ने फसलों में अपने ‘शोणित की बूँदें’ मुसकाने की बात क्यों कही है?

उत्तर- कवि का आशय है कि फसलें उसके कठिन परिश्रम, पसीने और त्याग का परिणाम हैं। उसने दिन-रात मेहनत की है, इसलिए सुनहरी फसलों में उसे अपनी मेहनत दिखाई देती है।

 3.कवि ने फसलों को सुनहली क्यों कहा है?

उत्तर- पकने पर गेहूँ और अन्य फसलों का रंग सुनहरा(गोल्डन कलर) हो जाता है। यह खुशहाली और किसानों की मेहनत का प्रतीक है। इसलिए कवि ने पकी हुई फसलों को सुनहरी कहा है।

 4.गगन और सूर्य को कवि ने नया क्यों कहा है?

उत्तर- कवि ने गगन और सूर्य को नया इसलिए कहा है क्योंकि वे नए जीवन, नई आशा और नए विकास के प्रतीक हैं। गाँव की उन्नति और उज्ज्वल भविष्य ने वातावरण में नया उत्साह भर दिया है।

 भाषा कि ओर-

 उलझे शब्द सुलझाएँ

  1. कविता के शब्दों के अक्षर उलझ गए हैं, आइए मिलकर सुलझाते हैं-
उलझे अक्षर सही शब्द संकेत आपकी भाषा में
न ग ग गगन आसमान आकाश
लिहाखन खलिहान फसल रखने की जगह खेत का भंडारण स्थल
भा आ आभा चमक/रोशनी तेज
णिशोत शोणित रक्त खून
लविशा विशाल बहुत बड़ा बड़ा

 भाव समझें-

4.कविता में प्रयुक्त पंक्तियों में कुछ गहरे भाव छुपे हुए हैं। आप कविता की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए और बताइए कि कवि क्या कहना चाहता है-

क्र. कविता की पंक्ति भाव
(i) मेरी रग-रग के शोणित की बूँदें नई आशा और नया आरंभ
(ii) मेरी भी आभा है इसमें प्यार और उम्मीद से पाला
(iii) सपनों ने सहलाया था मैंने भी योगदान दिया है
(iv) नया सूर्य जो चमक रहा है मेरी कड़ी मेहनत का फल
(v) खलिहान भर गया मेरे परिश्रम और बलिदान का अंश

 पाठ के आगे

1. क्या सच में फूलों को सपनों से सहलाया जा सकता है? कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर- नहीं, वास्तव में फूलों को सपनों से नहीं सहलाया जा सकता। यह एक कल्पना है, जिससे कवि बताना चाहता है कि प्रेम, आशा, लगन और स्नेह से किए गए कार्य के परिणाम सुंदर होते हैं।

 2.यदि आप एक किसान होते और आपका खलिहान सुनहली फसलों से भर जाता, तो उस समय आपके मन में क्या भावनाएँ होतीं? कल्पना करके बताइए।

उत्तर- यदि मैं किसान होता, तो अपनी मेहनत की  सफलता को  देखकर बहुत प्रसन्न और गर्व महसूस करता। परिवार की खुशहाली और अच्छी फसल के लिए ईश्वर के प्रति धन्यवाद प्रकट करता।

 3.यदि इस कविता में सूर्य और फूल बोल सकते, तो वे कवि से क्या संवाद करते? अपनी कल्पना से निम्नलिखित संवाद को पूरा कीजिए-

उत्तर- सूर्य तुम्हारे परिश्रम ने गाँव को उजाला दिया है। मैं तुम्हारी योगदान पर गर्व करता हूँ।

फूल तुम्हारे प्रेम, देखभाल और मेहनत से ही हम खिले हैं। मैं तुम्हारी मेहनत और सपनों की सुगंध फैलता रहूँगा।

===x===x==x===x===x==डॉ. अजीत भारती

By hindi Bharti

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