अतिशयोक्ति अलंकार के 100 उदाहरण
अतिशयोक्ति अलंकार के 100 उदाहरण?
अतिशयोक्ति अलंकार काव्य का बहुत लोकप्रिय और प्रभावशाली अलंकार है। ‘अतिशय’ शब्द का अर्थ है—अधिकता, विस्तार या बढ़ाव। “जब कवि किसी वस्तु, गुण, भाव, आकार, प्रभाव या क्रिया को उसकी वास्तविक सीमा से बहुत अधिक बढ़ाकर प्रस्तुत करता है, तब वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है”। यह बढ़ाव स्वाभाविक नहीं होता, बल्कि कल्पना के सहारे उसे अत्यधिक रूप दिया जाता है, जिससे भाषा अधिक प्रभावपूर्ण, चित्रमय, भावपूर्ण और आकर्षक बन सके।
अतिशयोक्ति किसी वस्तु को अनंत, अनुपम या अद्भुत रूप में दिखाने की प्रवृत्ति है। इसका उद्देश्य पाठक या श्रोता के मन में गहरा प्रभाव उत्पन्न करना होता है। जैसे—“उसके रोने से नदी बह निकली”, “वह इतना तेज दौड़ा कि हवा भी पीछे रह गई”, “उसकी सुगंध से पूरा वन महक उठा”—ये उदाहरण वास्तविक नहीं, परंतु भाव को अधिक सशक्त बनाने के लिए तुलनात्मक रूप से बढ़ाकर कहे गए हैं।
कवि अपनी कविता को अधिक जीवंत तथा कल्पनापूर्ण बनाने के लिए अक्सर अतिशयोक्ति का प्रयोग करते हैं। यह अलंकार वीर रस, श्रृंगार रस और करुण रस में विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। वीर रस में यह शौर्य, उत्साह और अद्भुत शक्ति को असाधारण रूप में दिखाता है—जैसे “एक ही वार में पर्वत दो भाग हो गया।” वहीं श्रृंगार रस में यह सौंदर्य, प्रेम और आकर्षण को उभारकर प्रकट करता है—“उसकी मुस्कान से फूल भी खिल उठे।” करुण रस में अतिशयोक्ति दुःख, पीड़ा और करुणा को चरम सीमा तक पहुँचा देती है—“वह इतना रोया कि आँसू का सागर भर गया।”
अतिशयोक्ति अलंकार के प्रयोग से भाषा उबाऊ नहीं रहती, बल्कि उसमें एक विशेष प्रकार की चमक, ऊष्मा और कल्पना की उड़ान आ जाती है। यह अलंकार पाठक के मन में भावनाओं को तीव्र रूप से स्पर्श करता है और उसे दृश्यात्मक अनुभूति प्रदान करता है। इसी कारण यह अलंकार कविता, कहानी, भाषण तथा दैनिक बोलचाल में भी व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
इस प्रकार, अतिशयोक्ति अलंकार भाषा की सौंदर्य-शक्ति को बढ़ाकर अभिव्यक्ति को अधिक सशक्त, प्रभावी और कल्पनापूर्ण बनाता है।
अतिशयोक्ति अलंकार के 100 उदाहरण व्याख्या सहित
अतिश्योक्ति अलंकार की परिभाषा- जिस कविता में कोई बात बढ़ाचढ़ा कर कही जाती है, उसे आतिशयोक्ति अलंकार कहते हैं ।
उदाहरण-1
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वह तो दुःख में पहाड़-सा टूट गया।
व्याख्या: दुख की मात्रा को बहुत बढ़ाकर बताया गया है। -
उसकी हँसी से पूरा वातावरण गूंज उठा।
व्याख्या: हँसी की तीव्रता को बढ़ा-चढ़ाकर कहना। -
राम की वीरता का सूरज भी लज्जित है।
व्याख्या: वीरता की तुलना सूरज से कर अतिशयोक्ति। -
तुम्हारी आवाज़ तो बादल फाड़ दे।
व्याख्या: बहुत तेज आवाज़ को बढ़ाकर कहा। -
वह इतना चलता है कि धरती थक जाए।
व्याख्या: अधिक चलने को बढ़ाकर बताना। -
उसके रोने से नदी बह निकली।
व्याख्या: रोने की मात्रा का अतिशयोक्ति रूप। -
उसके गुस्से से पहाड़ भी काँपे।
व्याख्या: अत्यधिक क्रोध दिखाने हेतु अतिशयोक्ति। -
वह तो भूख से पहाड़ खा जाए।
व्याख्या: भूख की तीव्रता को बढ़ाकर कहना। -
उसकी आँखों में पूरे सागर की गहराई है।
व्याख्या: आँखों की गहराई का अतिरंजन। -
उसकी मुस्कान से फूल भी शर्मा जाएँ।
व्याख्या: मुस्कान की कोमलता/सुंदरता का अतिशयोक्ति। -
वह तो इतना बुद्धिमान है कि किताबें उससे सीखें।
व्याख्या: बुद्धिमानी बढ़ाकर बताना। -
उसकी दौड़ से हवा भी पीछे छूट जाए।
व्याख्या: तेज दौड़ का अतिरंजित वर्णन। -
उसका दिल तो सागर जितना बड़ा है।
व्याख्या: उदारता की अतिशयोक्ति। -
उसके बाल रात से भी काले हैं।
व्याख्या: बालों की कालेपन की अतिशयोक्ति। -
वह खुशी से उछलकर आसमान छू आया।
व्याख्या: खुशी की तीव्रता बढ़ाई। -
उसकी बातों में मिठास की नदियाँ बहती हैं।
व्याख्या: मीठी बातों का अतिशयोक्ति रूप। -
इतने लोग थे कि सागर भी छोटा पड़े।
व्याख्या: भीड़ की अतिशयोक्ति। -
उसके हाथों में पहाड़ उठाने की ताकत है।
व्याख्या: शक्ति का बढ़ा-चढ़ा वर्णन। -
मैं तो थककर मर ही गया था।
व्याख्या: थकावट को बढ़ा-चढ़ाकर कहना। -
वह इतना छोटा है कि हवा भी उसे उड़ा ले जाए।
व्याख्या: छोटेपन की अतिशयोक्ति। -
वह इतना लंबा है कि बादलों को छू ले।
व्याख्या: ऊँचाई की अतिशयोक्ति। -
उसका सौंदर्य चाँद को भी मात देता है।
व्याख्या: सौंदर्य का बढ़ा-चढ़ा वर्णन। -
वह गुस्से में आग बन जाता है।
व्याख्या: क्रोध की तीव्रता बढ़ाकर बताना। -
उसकी आवाज़ तो शेर को भी डरा दे।
व्याख्या: आवाज़ के प्रभाव का अतिशयोक्ति। -
उसने तो किताबों का पहाड़ पढ़ डाला।
व्याख्या: अधिक पढ़ने को अतिरंजित रूप दिया। -
उसकी चाल से धरती हिलती है।
व्याख्या: चलने को अतिशयोक्ति से कहना। -
उसकी हिम्मत आसमान जितनी ऊँची है।
व्याख्या: हिम्मत का अतिरंजन। -
वह इतना रोया कि कमरा डूब गया।
व्याख्या: अतिशयोक्ति। -
उसकी बातों का कोई अंत नहीं।
व्याख्या: अधिक बोलने की अतिरंजना। -
वह तो खुशी में पागल हो गया।
व्याख्या: खुशी की अतिशयोक्ति। -
सूरज भी उसके सामने फीका है।
व्याख्या: गुण को बढ़ाना। -
वह इतना तेज दौड़ा कि हवा भी रुक गई।
व्याख्या: अधिक तेज दौड़ने की अतिशयोक्ति। -
उसकी हँसी में सोने की खनखनाहट है।
व्याख्या: हँसी की सुंदरता का अतिरंजन। -
वह इतना मोटा है कि धरती भी झुक जाए।
व्याख्या: मोटापे का अतिशयोक्ति रूप। -
उसकी आवाज़ शहद से भी मीठी।
व्याख्या: मधुरता की अतिशयोक्ति। -
मैं तो डर के मारे पत्थर हो गया।
व्याख्या: भय की अतिशयोक्ति। -
उसकी चाल मोर से भी सुंदर।
व्याख्या: चाल की अतिशयोक्ति। -
वह इतना तेज पढ़ता है कि पन्ने खुद पलट जाएँ।
व्याख्या: पढ़ने की गति को बढ़ा-चढ़ाकर कहना। -
उसके प्रेम में पर्वत भी पिघल जाएँ।
व्याख्या: प्रेम की तीव्रता का अतिशयोक्ति। -
वह इतना काम करता है कि दिन भी छोटा पड़ जाए।
व्याख्या: मेहनत की अतिशयोक्ति। -
उसकी विचित्र बातें पहाड़ों को हिला दें।
व्याख्या: बातों के प्रभाव का अतिरंजन। -
वह दुःख में पत्थर बन गया।
व्याख्या: भाव-अतिशयोक्ति। -
उसकी आँखें जुगनू-सी चमकती हैं।
व्याख्या: चमक की अतिशयोक्ति। -
इस ठंड में तो हड्डियाँ जम जाएँ।
व्याख्या: ठंड की तीव्रता बढ़ाना। -
वह इतना तेज दौड़ा कि पलों में गायब हो गया।
व्याख्या: गति का अतिरंजन। -
उसकी बातों में चमत्कार है।
व्याख्या: बातों के प्रभाव को बढ़ाना। -
वह पढ़ाई में इतना डूबा कि दुनिया भूल गया।
व्याख्या: ध्यान की अतिशयोक्ति। -
यह समाचार आग की तरह फैल गया।
व्याख्या: सूचना के फैलने का अतिरंजन। -
उसने प्रेम में आसमान रंग दिया।
व्याख्या: भावनाओं की अतिशयोक्ति। -
वह रात भर जागा, मानो अनगिनत सूरज उग आए।
व्याख्या: जागने का अतिशयोक्ति।
संक्षिप्त उदाहरण व्याख्या सहित
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उसकी नजरें बिजली-सी चलती हैं। – तीव्रता बढ़ाना
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वह दुख में समुद्र-सा भर गया। – अधिकता
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उसके पास ज्ञान का भंडार है। – ज्ञान बढ़ाना
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उसकी एक आवाज पर दुनिया टूट पड़े। – प्रभाव बढ़ाना
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उसकी यादें पहाड़-सी भारी। – गहराई बढ़ाना
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वह तो पलक झपकते गायब हो गया। – गति बढ़ाना
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उसके शब्द चाकू-से काटते हैं। – तीखापन बढ़ाना
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उसकी हँसी फूल बरसाती है। – सौम्यता बढ़ाना
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यह समस्या पहाड़ बन गई। – कठिनाई बढ़ाना
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वह इतना मेहनती कि समय हार जाए। – मेहनत बढ़ाना
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उसकी गर्मजोशी आग-सी। – ऊष्मा बढ़ाना
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उसकी शांति समुद्र-सी। – गहराई बढ़ाना
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वह गुस्से में बादल-सा गरजा। – क्रोध बढ़ाना
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उसकी दौड़ बिजली को भी मात दे। – गति बढ़ाना
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उसके तर्क पहाड़-से मजबूत। – मजबूती बढ़ाना
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उसकी भूख कुएँ-सी गहरी। – भूख बढ़ाना
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वह इतना हास्यास्पद कि पेट फट जाए। – हँसी बढ़ाना
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उसके हाथ सोना उगाते हैं। – कौशल बढ़ाना
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उसकी कलम आग उगलती है। – लेखन बढ़ाना
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उसकी खुशी आसमान फोड़ दे। – खुशी बढ़ाना
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वह आया जैसे तूफान आ गया। – आगमन की अतिशयोक्ति
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वह रोया जैसे बादल फट पड़े। – रोने की अतिशयोक्ति
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उसका साहस पर्वत-सा अडिग। – साहस बढ़ाना
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उसका मन सागर-सा विशाल। – व्यापकता
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उसकी निगाहें तीर-सी चुभती हैं। – पैना दिखाना
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वह इतना थका कि हड्डियाँ जवाब दे दें। – थकान बढ़ाना
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उसकी बातों में जादू है। – प्रभाव बढ़ाना
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उसके गुस्से की आग दूर से दिखे। – तीव्रता
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उसने प्रेम में दुनिया बसा ली। – प्रेम बढ़ाना
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यह फूल इतना सुंदर कि चाँद उतर आए। – सुंदरता
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उसकी चिंता पर्वत-सी। – बढ़ाव
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उसकी चाल हवा-सी। – गति
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वह इतना डर गया कि प्राण उड़ गए। – डर
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उसकी निगाहें आग लगा दें। – पैना प्रभाव
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यह खुशी तो पर्वत हिला दे। – प्रभाव
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उसके शब्द दिल को चीर दें। – पैना प्रभाव
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उसकी सुंदरता सूर्य को भी फीका कर दे। – अतिरंजन
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वह इतना चतुर कि चालाकी भी सीख ले। – बुद्धि
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उसकी शरारतें दिन को रात कर दें। – बढ़ाव
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उसका दुःख समुद्र में डूबा हुआ। – अधिकता
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प्रेम में उसने आकाश समेट लिया। – भाव
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उसकी पुकार पहाड़ों को हिला दे। – आवाज
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वह इतना हल्का कि हवा ले उड़े। – हल्कापन
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उसकी ताकत लोहे को पिघला दे। – शक्ति
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उसकी मुस्कान दुनिया रोशन कर दे। – सौंदर्य
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वह इतना साहसी कि मृत्यु भी डर जाए। – साहस
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उसकी दौड़ में धरती कांपती है। – गति
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वह इतना शांत कि समय थम जाए। – शांति
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उसका प्रेम पत्थर को मोम बना दे। – प्रेम
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उसकी आँखों में ब्रह्मांड बसता है। – गहराई