हास्य रस और करुण रस
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यूपी बोर्ड कक्षा-10 विषय-हिंदी
काव्य सौन्दर्य के तत्व- रस, अलंकार, छंद
(रस–हास्य रस और करुण रस)
प्रश्न-1. हास्य रस परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
या
हास्य रस का स्थाई भाव लिखते हुए उसका एक उदाहरण भी लिखिए।
उत्तर-परिभाषा- हास्य रस का स्थाई भाव ‘हास’ है। जब किसी व्यक्ति के विचित्र रूप, विचित्र आकार, विचित्र वेश–भूषा, वाणी और चेष्टा आदि से हँसी उत्पन्न होती है, तो उसे हास्य रस कहते हैं।
या
‘हास’ नामक स्थाई भाव ही ‘हास्य रस’ में परिणत(बदलना) हो जाता है। तो उसे हास्य रस कहते हैं।
उदाहरण- “बंदर ने कहा बंदरिया चलो नहाने गंगा,
बच्चों को छोड़ो घर में होने दो हुड़दंगा”।
स्पष्टीकरण- स्थाई भाव- हास (हँसी)
विभाव- (क) आलंबन- बन्दर, बंदरिया
(ख) उद्दीपन- हुड़दंग
अनुभाव- बंदर का बंदरिया से कहना
संचारी भाव–चंचलता,शरारत, उत्सुकता, लापरवाही
प्रश्न-2. करुण रस का स्थाई भाव लिखते हुए उसका एक उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर-परिभाषा- करुण रस का स्थायी भाव ‘शोक’ है। जब दुःख, पीड़ा, हानि और वियोग के कारण हृदय पिघल जाता है, तो उसे करुण रस कहते हैं।
या
‘शोक’ नमक स्थायी भाव ही ‘करुण रस’ में परिणत हो जाता है, तो उसे करुण रस कहते हैं।
उदाहरण- “सखि वे मुझसे कहकर जाते,
सिद्धि हेतु स्वामी गए यह गौरव की बात”।
स्पष्टीकरण- स्थाई भाव- शोक
आलम्बन- प्रियजन
संचारी भाव-चिंता, ग्लानि, मोह, विषाद, व्याकुल
अनुभाव- विलाप, दुःख, उदास, आँसू,
प्रश्न-3. ‘हास्य रस’ का स्थाई भाव क्या है ?
- भय (B) विस्मय (C) उत्साह (D) हास
प्रश्न-4. ‘करुण रस’ का स्थाई भाव क्या है ?
- रति (B) निर्वेद (C) शोक (D) उत्साह
प्रश्न-5.निम्नलिखित पंक्तियों में पहचानकर बताइए कि कौन-सा रस है? उस रस की परिभाषा देते हुए उसका स्थायी भाव भी लिखिए-
1.“विपति बँटावन बंधु बाहु बिन करौं भरोसो काको ?
उत्तर- रस का नाम- करुण रस, स्थायी भाव- शोक
- नाना वाहन नाना वेषा।
बिसरे सिव समाज निज देखा॥
कोउ मुखहीन विपुल मुख काहू।
बिन पद-कर कोऊ बहु-बाहू।
उत्तर- रस का नाम- हास्य स्थायी भाव- हास
3.शोक-विकल सब रोवहिं रानी।
रूप राशि, बल, तेज बंखानी॥”
करहिं विलाप अनेक प्रकार।
परहीं भूमि-तल बारहिं बार॥”
उत्तर- रस का नाम- करुण स्थायी भाव- शोक
4.“हँसि-हँसि भाजैं देखि दूलह दिगम्बर को,
पाहुनी जे आवे हिमाचल के उछाह में।
सीस पर गंगा हँसै, भुजनि भुजंगा हँसै,
हास ही को दंगा भयो, नंगा के विवाह में॥”
उत्तर- रस का नाम- हास्य स्थायी भाव- हास
- “जथा पंच बिनु खग अति दीना।
मनि बिनु फन करिवर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही।
जौ जड़ दैव जियावइ मोही॥”
उत्तर- रस का नाम- करुण स्थायी भाव- शोक
6.“तात तात हा तात पुकारी।
परे भूमितल व्याकुल भारी।
चलन न देखन पायउँ तोही।
तात न रामहिं सौंपेउ मोही॥”
उत्तर- रस का नाम- करुण स्थायी भाव- शोक
===x====x====x====x===x======x===डॉ.अजीत भारती
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