नई कहानी : परिचय एवं विशेषताएँ
नई कहानी : परिचय एवं विशेषताएँ?
प्रश्न-नई कहानी : परिचय एवं विशेषताएँ
अथवा
नई कहानी पर प्रकाश डालिए?
अथवा
नई कहानी की विशेषताएँ बताइए?
भूमिका-
नई कहानी हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली धारा है। इसका उदय स्वतंत्रता के बाद, लगभग सन् 1950–1956 के बीच माना जाता है। यह आधुनिक जीवन की कहानी है, जो समकालीन मनुष्य की समस्याओं, मानसिक संघर्षों और बदलते सामाजिक मूल्यों को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करती है। नई कहानी केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाइयों को समझाने और पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से लिखी गई।
नई कहानी का स्वरूप-
नई कहानी ने प्रेमचंद-युग की आदर्शवादी और घटना-प्रधान कहानियों से अलग राह अपनाई। इसमें मध्यवर्गीय जीवन, व्यक्तिवाद, मनोवैज्ञानिक यथार्थ और सामाजिक विसंगतियों का सूक्ष्म चित्रण मिलता है। इस धारा ने हिंदी कहानी को पारंपरिक ढाँचे से बाहर निकालकर आधुनिक संवेदनाओं से जोड़ा।
रामचन्द्र तिवारी के शब्दों में—
“आज कहानी स्वयं बोलने लगी है। कथाकार की व्याख्या या टीका-टिप्पणी अब नहीं मिलती। ‘आनुभूतिक इकाई’ जिस रूप में ढलती है, वही उसका शिल्प बन जाता है।”
प्रमुख कहानीकार
नई कहानी आंदोलन से जुड़े प्रमुख रचनाकारों में मोहन राकेश, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर, भीष्म साहनी, निर्मल वर्मा, मन्नू भंडारी, फणीश्वरनाथ रेणु, मार्कण्डेय, रघुवीर सहाय आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।
नई कहानी की प्रमुख विशेषताएँ
1. आधुनिक जीवन का यथार्थ चित्रण-
नई कहानी में शहरी जीवन की भागदौड़, नौकरी की अनिश्चितता, महँगाई, बेरोजगारी, अकेलापन और पारिवारिक तनाव का सजीव चित्र मिलता है। यह जीवन को जैसा है वैसा प्रस्तुत करती है।
2. व्यक्ति के आंतरिक जीवन पर बल-
बाहरी घटनाओं की अपेक्षा व्यक्ति के मन के भीतर चल रहे संघर्ष, द्वंद्व, आशा-निराशा और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को अधिक महत्व दिया गया है।
3. मध्यवर्गीय जीवन की समस्याएँ-
नई कहानी का केंद्रीय वर्ग मध्यवर्ग है—जिसकी आर्थिक कठिनाइयाँ, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और सामाजिक दबाव कहानी का प्रमुख विषय बनते हैं।
4. मनोवैज्ञानिक चित्रण-
पात्रों के निर्णयों के पीछे की मानसिक प्रक्रिया, उनकी सोच और भावनात्मक कारणों का सूक्ष्म विश्लेषण नई कहानी की विशेष पहचान है।
5. सामाजिक और नैतिक मूल्यों में परिवर्तन-
परंपरागत मूल्यों के क्षरण और नए मूल्यों—स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और समानता—के उभार को नई कहानी स्पष्ट करती है।
6. संबंधों में तनाव और टूटन-
आधुनिक जीवन-शैली के प्रभाव से पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में आई दरारें—पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चों के रिश्तों में तनाव—का यथार्थ चित्रण मिलता है।
7. स्वतंत्रता और आत्मसम्मान पर बल-
नई कहानी व्यक्ति की स्वतंत्र सोच और निर्णय की क्षमता को रेखांकित करती है। पात्र परंपराओं से संघर्ष कर अपने अधिकार और सम्मान के लिए खड़े दिखाई देते हैं।
8. सरल और सहज भाषा-शैली-
इस धारा की भाषा सरल, सीधी और बोलचाल की है, जिससे सामान्य पाठक भी आसानी से कथ्य से जुड़ जाता है।
9. घटनाओं से अधिक अनुभूति पर जोर-
बड़ी घटनाओं के स्थान पर छोटी-छोटी अनुभूतियों के माध्यम से जीवन की गहरी सच्चाइयाँ उजागर की जाती हैं।
10. सामाजिक विसंगतियों की अभिव्यक्ति-
भ्रष्टाचार, गरीबी, शोषण, अन्याय और असमानता जैसी सामाजिक बुराइयों को नई कहानी बेबाकी से सामने लाती है।
निष्कर्ष-
नई कहानी आधुनिक हिंदी साहित्य का सशक्त माध्यम है। यह व्यक्ति, परिवार और समाज के बदलते स्वरूप को ईमानदारी से प्रस्तुत करती है। मनोरंजन से आगे बढ़कर यह पाठक को चिंतन, आत्ममंथन और सामाजिक चेतना की ओर प्रेरित करती है।
लेखक: डॉ. अजीत भारती