सचेतन कहानी
प्रश्न-सचेतन कहानी का परिचय और विशेषताएँ बताइए।
अथवा
सचेतन कहानी क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर—
सचेतन कहानी हिंदी साहित्य की आधुनिक कहानी-धारा का एक महत्वपूर्ण रूप है। इसका विकास ‘नई कहानी’ के बाद हुआ। इस प्रकार की कहानी में लेखक जीवन की बाहरी घटनाओं को कम महत्व देकर मनुष्य की जाग्रत चेतना, उसकी सोच, अनुभूति, संवेदना और आत्मविश्लेषण को मुख्य विषय बनाता है। सचेतन कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं होता, बल्कि पाठक को जीवन, समाज और व्यक्ति की वास्तविकताओं पर सोचने और जागरूक बनने के लिए प्रेरित करना भी होता है।
इस कहानी में पात्र अपने जीवन की समस्याओं को केवल सहता नहीं, बल्कि उन्हें समझता है, उनके कारणों पर विचार करता है और अपने भीतर झाँककर आत्ममंथन करता है। इसलिए इस कहानी में मन की प्रक्रियाएँ, विचार-प्रवाह, स्मृतियाँ और मानसिक प्रतिक्रियाएँ अधिक महत्वपूर्ण बन जाती हैं।
इस आंदोलन के प्रवर्तक के रूप में महीप सिंह का नाम लिया जाता है। माना जाता है कि उन्होंने सन् 1964 ई. में “आधार” पत्रिका के माध्यम से इस कहानी-धारा को पहचान और दिशा दी।
सचेतन कहानी का अर्थ—
हिंदी साहित्य में सचेतन कहानी वह कहानी है जिसमें कथा का केंद्र मानव चेतना होती है। इसमें घटनाओं की अपेक्षा पात्र की जागरूकता, उसका सोचने का तरीका, अनुभव और आंतरिक संघर्ष अधिक प्रमुख होते हैं।
सचेतन कहानी की प्रमुख विशेषताएँ—
1. चेतना की प्रधानता
इस कहानी में पात्र की चेतना और मानसिक स्थिति ही कथा का आधार बनती है। बाहरी घटनाएँ गौण रहती हैं।
2. विचारशीलता
सचेतन कहानी पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करती है। इसमें जीवन, समाज और व्यक्ति से जुड़े प्रश्न उभरते हैं।
3. भावनात्मक गहराई
इसमें मनुष्य के भीतर छिपी संवेदनाएँ, पीड़ा, प्रेम, करुणा, अकेलापन आदि का गहरा चित्रण होता है।
4. आत्ममंथन और आत्मविश्लेषण
पात्र स्वयं से संवाद करता है, अपने निर्णयों और स्थितियों पर विचार करता है। यह इसका प्रमुख तत्व है।
5. घटनाओं की कमी
कई सचेतन कहानियों में बहुत अधिक घटनाएँ नहीं होतीं। कभी एक छोटी घटना से भी पूरी कहानी विकसित हो जाती है।
6. जीवन का सूक्ष्म चित्रण
पात्र के विचार, स्मृतियाँ, अनुभव, मानसिक द्वंद्व और संवेदनाओं का बारीकी से वर्णन किया जाता है।
7. आंतरिक यथार्थ की प्रस्तुति
यह कहानी बाहरी सामाजिक यथार्थ से अधिक व्यक्ति के भीतर के सत्य को दिखाती है, यानी अनुभूति का यथार्थ।
8. प्रतीकात्मक और संकेतात्मक शैली
लेखक सीधे निष्कर्ष देने के बजाय प्रतीक, संकेत और बिंबों के माध्यम से भाव व्यक्त करता है।
9. समय और स्मृति का प्रयोग
भूत, वर्तमान और भविष्य का क्रम चेतना के अनुसार बदलता रहता है। यादें कथा को आगे बढ़ाती हैं।
10. खुला और विचारोत्तेजक अंत
अधिकांश सचेतन कहानियों का अंत स्पष्ट निष्कर्ष की तरह नहीं होता। पाठक स्वयं अर्थ निकालता है।
11. भाषा में गहराई
भाषा सामान्यतः सरल होती है, पर उसमें अर्थ की परतें होती हैं। कम शब्दों में गहरे भाव व्यक्त होते हैं।
12. सामाजिक जागरूकता और संदेश
सचेतन कहानी पाठक को समाज और जीवन के प्रति सजग बनाती है तथा सकारात्मक दृष्टि विकसित करती है।
निष्कर्ष—
अतः कहा जा सकता है कि सचेतन कहानी आधुनिक मनुष्य की जागरूक मानसिक अवस्था, आत्मसंघर्ष और संवेदनात्मक यथार्थ की कहानी है। यह बाहरी घटनाओं से अधिक मनुष्य के भीतर चल रही मानसिक प्रक्रियाओं को उजागर करती है और पाठक को जीवन को समझने की नई दृष्टि देती है।
सचेतन कहानी के प्रमुख लेखक एवं रचनाएँ—
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महीप सिंह — युद्धमन
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रामदरश मिश्र — सीमा
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वेद राही — दरार
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रामकुमार भ्रम — गिरिस्तान
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बलदेव वंशी — एक खुला आकाश
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