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surdas ke pad previous paper 2010 to 2020 ? आज हम 11 साल में  पूछे गए । प्रश्नों के उत्तर बहुत ही आसान भाषा में दिए गए हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।


CBSE Board/Class-10/ हिंदी-अ/क्षितिज-2 (कव्यखंड)-पेपर-2010-20

पाठ-सूरदास के पद

नोट- 2010-2017 तक परीक्षा Term-I और Term-II में होती थी। ‘सूरदास के पद’ सिर्फ पहले टर्म में था।


सीबीएसई बोर्ड परीक्षा  2010 से 2020 तक ‘पाठ- सूरदास के पद’ से पूछे गए प्रश्न और उनके उत्तर।  

 


पेपर-2010

प्रश्न-1.गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपने प्रेमभाव की गहनता को किस प्रकार प्रकट किया है? सूरदास-रचित पदों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- गोपियाँ कृष्ण से बहुत गहरा प्रेम करती हैं। वे स्वयं को हारिल पक्षी के समान मानती हैं और श्रीकृष्ण के प्रेम को हारिल पक्षी की लकरी (लकड़ी) के समान बताती हैं। वे कृष्ण को मन, कर्म और वचन से अपने हृदय में बसाए हुए हैं। गोपियाँ कहती हैं कि जिस प्रकार चीटियाँ गुड़ से लिपटी रहती हैं, ठीक उसी प्रकार वे भी उनसे प्रेम के कारण बंधी हुई हैं।

प्रश्न-2. सूरदास द्वारा रचित पदों के आधार पर गोपियों के वाक्-चातुर्य की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- गोपियाँ कृष्ण के मित्र उद्धव को अपने वाक्-चातुर्य (बोलने में चतुर) से पराजित कर देती हैं। वे उन्हें बोलने का अवसर ही नहीं देती हैं। उनके वाक्-चातुर्य की विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

(i) गोपियाँ उद्धव को भाग्यशाली कहकर उन पर व्यंग्य करती हैं।

(ii) वे उद्धव के योग को कड़वी ककड़ी के समान बताती हैं।

(iii) गोपियाँ योग को एक प्रकार का रोग मानती हैं।

(iv) वे उद्धव के योग को नकारती हैं और प्रेम को महत्व देती हैं।

(v) गोपियाँ योग उन लोगों को देने की बात करती हैं, जिनका मन भटका हुआ है।

नोट- किन्हीं तीन बिंदु को लिखना पर्याप्त है।


Paper-2011

प्रश्न-3. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया ?

उत्तर- गोपियों को ऐसा विश्वास था कि श्री कृष्ण एक दिन उनसे मिलने ब्रज जरुर आएँगे, इसी आशा से वे विरह के दुःख को सह रहीं थीं लेकिन कृष्ण नहीं आते हैं। वे अपने बदले मित्र उद्धव को योग का संदेश देने के लिए भेज देते हैं। जिससे वे पहले से भी अधिक दुखी हो जाती हैं। जिस प्रकार घी को आग में डालने से आग और तेज हो जाती है। उसी प्रकार योग संदेश को सुनकर गोपियों का दुःख बढ़ जाता है।


पेपर-2012

प्रश्न-4. ‘सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यों करुई ककरी’- पंक्ति में गोपियों के कैसे मनोभाव दर्शाए गए हैं?

उत्तर- गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि हमने कृष्ण को अपने हृदय में बसा लिया है। पूरे समय हम सब उन्हीं का नाम रटती रहती हैं। तुम्हारा ये योग संदेश कड़वी ककड़ी के समान लगता है। हमें कृष्ण के प्रेम से कोई भी शक्ति दूर नहीं कर सकती है।

प्रश्न-5. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं?

उत्तर- गोपियाँ उद्धव को निम्नलिखित  उदाहरणों से उलहाना देती हैं-

(i) आप तो बहुत ही बड़भागी (भाग्यशाली) हैं।

(ii) आपके योग के बारे में हम लोगों ने न कभी सुना, देखा और न ही प्रयोग किया।

(iii) ये योग तो एक भयंकर बीमारी के समान है।

(iv) आपकी दशा कमल के पत्ते और तेल से भीगी हुई गगरी के समान है।

(v) लगता है आपने कभी प्रेम रूपी नदी में डुबकी नहीं लगाई है।

नोट- कोई तीन बिंदु लिखना पर्याप्त है।

प्रश्न-6. दूसरों को नीति की सीख देने वाले कृष्ण स्वयं अनीति का आचरण करने लगे। गोपियों ने ऐसा क्यों कहा है?

उत्तर- गोपियाँ कहती हैं- श्री कृष्ण हमेशा दूसरों को नीति की शिक्षा देते थे। सभी को प्रेम के बदले प्रेम देते थे। वे प्रेम को अधिक महत्व देते थे। लेकिन अब कृष्ण उन्हें प्रेम को छोड़कर ज्ञान और योग का मार्ग अपनाने की बात कहते हैं। गोपियों को समझाने के लिए अपने मित्र उद्धव को भेजते हैं। वे कहती हैं जो दूसरों को पहले नीति सिखाता था, अब वही स्वयं अनीति के मार्ग पर चल रहा है।

प्रश्न-7. गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन – से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं?

उत्तर- श्री कृष्ण मथुरा जाते समय गोपियों का मन चुरा ले गए थे। पहले  वे गोपियों को प्रेम के बदले प्रेम देते थे। लेकिन अब वे उन्हें प्रेम को भुलाकर  योग साधना का मार्ग अपनाने को कह रहे हैं। अब उनका हृदय बदल गया है। वे राजनीति वाली बाते करने लगे हैं। गोपियों को लगता है अब कृष्ण को उनसे प्रेम नहीं रहा है। इसलिए वे उनसे अपना मन वापस पा लेने की बात कह रही हैं।


पेपर-2013

प्रश्न-8. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है ?

उत्तर- उद्धव के व्यवहार की तुलना निम्नलिखित से की गई है-

(i) कमल के पत्ते से- उद्धव को कमल के पत्ते के समान बताया गया है। जिस प्रकार कमल का पत्ता पूरे समय जल के ऊपर रहता है फिर भी उस पर जल का प्रभाव नहीं पड़ता है।

(ii) तेल लगे गागर से- जिस प्रकार गागर के ऊपर तेल लगाने के बाद जब उसे पानी में डुबोया जाता है, तो उसके ऊपर जल की एक भी बूँद नहीं रूकती है।

   ठीक उसी प्रकार उद्धव कृष्ण के साथ रहते हैं फिर भी वे उनके प्रेम से प्रभावित नहीं होते हैं । अथवा उद्धव पर उनके प्रेम का प्रभाव दिखाई नहीं देते हैं।


पेपर-2014

प्रश्न-9. गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- गोपियाँ उद्धव पर व्यंग्य करती हुई उन्हें भाग्यवान कहती हैं। वास्तव में वे उसकी प्रशंसा नहीं कर रहीं हैं बल्कि उसका उपहास कर रही हैं। उनका कहने का भाव यह है कि आप कृष्ण के साथ रहते हैं फिर आपको उनसे प्रेम नहीं हुआ। न ही आप प्रेम को समझ पाए। ये आपके लिए सच में दुर्भाग्य की बात है।

प्रश्न-10.  ‘जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जकरी।’ इस पंक्ति द्वारा गोपियों की किस मनःस्थिति का वर्णन किया गया है ?

उत्तर- गोपियाँ श्रीकृष्ण से बहुत प्रेम करती हैं। इसीलिए वे जागते, सोते, स्वप्न में, दिन और रात में केवल उनका ही नाम जपती रहती हैं। वे उन्हें पूरी तरह से अपने हृदय और मन में बसा चुकी हैं। उनको कृष्ण के बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता है।

प्रश्न-11. गोपियाँ योग संदेश को कैसे लोगों के लिए उपयुक्त मानती हैं?

उत्तर- गोपियाँ योग संदेश को ऐसे लोगों के लिए उपयुक्त मानती हैं, जिनका मन एक स्थान पर नहीं रहता है। जिनका मन चंचल है। चकरी के समान इधर-उधर घूमता रहता है। हमारा मन तो पहले से ही श्री कृष्ण के प्रेम में लगा हुआ है।

प्रश्न-12. सूरदास के पदों को पढ़कर आपको गोपियों की किस भावना की प्रतीति होती है और वे किसके प्रति अपना निश्छल प्रेम प्रगट करती हैं?

उत्तर- सूरदास के पदों में गोपियाँ कृष्ण से अगाध प्रेम करती हैं। वे विरहाग्नि में जल रही हैं। सूरदास ने गोपियों के प्रेम को कई उपमानों से दर्शाया है। पदों में गोपियों के निःस्वार्थ प्रेम की प्रतीति का चित्रण है। गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपना निश्छल (धोखा रहित) प्रेम प्रगट (प्रत्यक्ष) करती हैं।

प्रश्न-13. गोपियाँ उद्धव से ऐसा क्यों कहती हैं कि “मन की मन ही माँझ रही” ? उनके मन में क्या बात है जिसे वे प्रगट करने में अब कोई फायदा नहीं समझती?

उत्तर- गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि मेरे  मन में बहुत से प्रश्न हैं जिनके उत्तर केवल श्री कृष्ण ही दे सकते थे। लेकिन वे तो आए नहीं। हम अपने मन की बातें   किसी दूसरे से कह भी नहीं सकतीं। क्योंकि किसी अन्य के सामने प्रगट करने से कोई फायदा नहीं है।


पेपर-2015

प्रश्न-14. गोपियाँ योग का संदेश किसे देने को कहती हैं? उनके मन में कौन रमा हुआ है? ‘पद’ के आधार पर लिखिए।

उत्तर- गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि योग संदेश उन लोगों को जाकर दे दो जिनका मन भटकता रहता है। हम सभी के हृदय में तो श्री कृष्ण बसे हुए हैं। हमारा मन उनके प्रेम में लगा हुआ है। योग की हमें कोई जरूरत नहीं है। सोते-जागते और दिन-रात सभी उनका ही नाम लेती रहती हैं।

प्रश्न-15. उद्धव के गुरु कौन थे? उन्होंने उन्हें कौन-सा ग्रंथ पढ़ाया है?

उत्तर- ‘पाठ- सूरदास के पद’ के आधार पर उद्धव के गुरु कृष्ण जी थे। उन्होंने ही  उद्धव को ज्ञान के मार्ग पर चलने वाला ग्रंथ पढ़ाया है।


surdas ke pad previous paper 2010 to 2020 क्या है?


पेपर-2016

प्रश्न-1. सूरदास द्वारा रचित तथा आपके द्वारा पठित पदों की भाषा तथा सूरदास की प्रमुख रचना के नाम लिखकर उनकी एक-एक विशेषता बताइए।

उत्तर- सूरदास भक्तिकाल के कवि हैं। उनके पदों में ब्रज भाषा का प्रयोग किया गया है। भाषा सरल और मधुर है। कहीं -कहीं अरबी-फारसी और संस्कृत के शब्द दिखाई देते हैं। सूरसागर, सूरसारावली और साहित्य लहरी उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।

प्रश्न-2. ‘तेल की गागर’ के दृष्टांत के माध्यम से कवि क्या भाव प्रकट करना चाहता है।

उत्तर- ‘तेल की गागर’ के दृष्टांत के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि  जिस प्रकार तेल से भीगी गगरी को पानी में डुबोने से उसके सतह पर पानी की एक भी बूँद नहीं ठहरती है। अर्थात् पानी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उसी प्रकार उद्धव श्री कृष्ण से साथ रहते हैं। फिर भी उन पर कृष्ण के प्रेम का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता है। अथवा उद्धव उनके प्रेम को समझ नहीं पाते हैं।

प्रश्न-3.गोपियाँ किधर से गुहार की अपेक्षा कर रहीं थीं तथा अब वहाँ से उन्हें कौन-सी धारा बहती हुई दिखाई दे रही है।

उत्तर- गोपियाँ श्रीकृष्ण से बहुत प्रेम करती हैं। इसलिए उन्होंने कृष्ण से प्रेम की गुहार लगाई। उधर से प्रेम का सन्देश तो नहीं आया बल्कि कृष्ण ने उद्धव के द्वारा योग का संदेश भेज दिया। जिस कारण गोपियों को वहाँ से योग धारा ही बहती हुई दिखाई दे रही है।

प्रश्न-4.सूरदास के काव्य-भाषा की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए ?

उत्तर- सूरदास के काव्य-भाषा की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

(i) उनकी काव्य-भाषा सरल और बोधगम्य है।

(ii) उन्होंने यथा स्थान रस, छंद और अलंकारों का सुन्दर प्रयोग किया है।

(iii) सूर ने संस्कृत और अरबी-फारसी के मधुर शब्दों का प्रयोग किया है।


पेपर-2017

सूरदास पाठ से 2017 में कोई प्रश्न नहीं पूछा गया था।


पेपर-2018

सूर पाठ से  2018 में कोई प्रश्न नहीं पूछा गया था।


पेपर-2019

प्रश्न-5. ‘सूरदास’ के पद के आधार पर लिखिए कि गोपियों ने किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलहाने दिए हैं।

उत्तर- गोपियाँ उद्धव को उलहाना देती हुई कहती हैं कि आप कमल के पत्ते के समान हैं, जो पानी में रहते हुए भी उसके प्रभाव से दूर रहता है। दूसरे उलहाने में वे तेल की गगरी के समान बताती हैं। जिस प्रकार तेल की गगरी को पानी में डुबोकर बाहर निकालने पर एक भी बूँद नहीं रूकती है। उसी तरह आप भी कृष्ण के सानिध्य में रहकर भी उनके प्रेम से प्रभावित नहीं हुए।


पेपर-2020

प्रश्न-6. ‘हरि हैं राजनीति पढ़ आए’ – में राजनीति से कृष्ण की किस नीति की ओर गोपियों ने व्यंग्य किया है और क्यों?

उत्तर- गोपियाँ व्यंग्य करती हुई कहती हैं कि श्रीकृष्ण ने शायद राजनीति सीख ली है। इसीलिए वे स्वयं न आकर अपने मित्र उद्धव को भेज दिया। मिलने का वचन देकर वापस भी नहीं आए। उन्होंने प्रेम संदेश के बदले योग भेज दिया। वे राजकाज में इतने वयस्त हो गए हैं कि अपनों को ही भुला बैठे।

प्रश्न-7.गोपियों के माध्यम से सूर ने निर्गुण भक्ति पर कृष्ण-भक्ति को बेहतर साबित किया है-इस पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर- गोपियाँ श्री कृष्ण से सच्चा प्रेम करती हैं। उनके प्रेम में किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं है। उन्होंने कृष्ण को हृदय में बसा रखा है। जबकि दूसरी ओर निर्गुण भक्ति में योग को गोपियाँ कड़वी ककड़ी के समान बताती हैं। उनकी नजर में यह एक बीमारी है। उनकी योग में कोई रूचि नहीं है। इस प्रकार गोपियों की कृष्ण- भक्ति निर्गुण- भक्ति से बेहतर है।

प्रश्न-8. ‘उद्धव तुम हो अति बड़भागी’- में उद्धव को बड़भागी कहने का क्या तात्पर्य है? गोपियाँ खुद को उद्धव से अलग कैसे मानती हैं?

उत्तर- गोपियाँ उद्धव को बड़भागी कहकर  व्यंग्य करती हैं। वास्तव में उद्धव भाग्यशाली नहीं बल्कि भाग्यहीन है। तुम कृष्ण के पास रहते हुए भी उनके प्रेम को नहीं जान पाए। और एक हम सब हैं, जो उनसे दूर रहकर भी उनके प्रेम में गुड़ से लिपटी चीटियों के समान बंधे हुए हैं।

समाप्त


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  आपको ये प्रश्न -उत्तर कैसे लगे।   

…………………पार्ट-2

धन्यवाद!

डॉ. अजीत भारती

 

By hindi Bharti

Dr.Ajeet Bhartee M.A.hindi M.phile (hindi) P.hd.(hindi) CTET

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