Mere Sang Ki Auraten

Mere Sang Ki Auraten

Mere Sang Ki Auraten ?

कृतिका कक्षा-9 (NCERT)

पाठ-मेरे संग की औरतें (Mere Sang Ki Auraten)-मृदुला गर्ग


 प्रश्न-1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं ?

उत्तर- लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी वह उनके व्यक्तित्व से प्रभावित थीं। लेकिन उनके बारे में उसने अपनी माँ से सुना था कि उसकी नानी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में नाना के मित्र प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्यारेलाल शर्मा से भेंट की थी। उस भेंट में उन्होंने अपनी बेटी की शादी किसी क्रांतिकारी से करवाने की इच्छा प्रकट की थी। अंग्रेजों के किसी भक्त से नहीं। उनकी इस हिम्मत में देश के प्रति सच्ची प्रेम भावना थी।  वे जीवन-भर परदे में रहीं। लेकिन उसके बाद भी उन्होंने पहलीबार किसी अन्य पुरुष से मिलने का साहस किया। इससे उनके साहसी व्यक्तित्व और सच्ची स्वतंत्रता की भावना का पता चलाता है। लेखिका इन्हीं गुणों के कारण अपनी नानी का सम्मान करती थी।


प्रश्न-2. लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही ?

उत्तर- लेखिका की नानी ने आजादी के आंदोलन में कभी खुलकर भाग नहीं लिया था। लेकिन स्वतंत्रता की भावना उनके मन में हमेशा से रही है। उनके पति अंग्रेजों के बहुत बड़े भक्त थे, फिर भी उसने अंग्रेजियत को नहीं अपनाया और न ही कभी उसका प्रभाव उनपर  पड़ा। इसीलिए उसने अपनी बेटी की शादी किसी अंग्रेज भक्त से नहीं बल्कि एक देश भक्त क्रांतिकारी से करा दी। उनके मन में हमेशा से देश के प्रति प्रेम और अंग्रेजों के प्रति विद्रोह की भावना थी।


प्रश्न-3. लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में-

(क)लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर – (क) लेखिका की माँ की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

1-माँ बहुत ही सुन्दर और नाजुक थी।

2-वह एक स्वतंत्र विचारों वाली महिला थी।

3-वे ईमानदार, सच्ची और निष्पक्ष थीं।

4-उन्होंने अपनी बेटियों को कभी अच्छे-बुरे की सीख नहीं दी।

5-वे स्वतंत्रता आंदोलन के लिए काम करती थीं।

6-घर के ठोस कामों में उनसे राय ली जाती थी, उनकी राय को पत्थर की लकीर माना जाता था।

7-उनका अधिकांश समय किताबें पढ़ने और संगीत सुनने में बीतता था।

8-वे कभी किसी की चुगली नहीं करती थीं।

9-वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं।

10-उनसे कभी घर का काम नहीं करवाया जाता था।


प्रश्न-3.(ख) लेखिका की दादी के घर के महौल का शब्द – चित्र अंकित कीजिए।

उत्तर-(ख) लेखिका की दादी के घर का माहौल विचित्र था। क्योंकि उनके घर में कुछ अंग्रेजों के भक्त तो कुछ भारतीय प्रेमी थे। कहने का आशय यह कि एक ही घर में अलग-अलग विचारों के लोग संगठित होकर रहते थे। घर में किसी प्रकार के आपस में मतभेद नहीं थे। बच्चों की देखभाल सभी मिलकर करते थे। दादी महिला पक्षधर थीं। तो माँ किताबें पढ़ने, संगीत सुनने और साहित्य पर चर्चा करने में व्यस्त रहती थीं। घर के सभी लोग अपने तरीके से रहने के लिए स्वतंत्र थे। कुल मिलकर घर का माहौल बहुत अच्छा था।


प्रश्न-4. आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी ?

उत्तर- लेखिका की परदादी एक साधारण महिला थी। वैसे उनके मन में लड़का और लड़की को लेकर कोई भेद नहीं था। फिर भी उन्होंने अपने समय में लड़की के साथ होने वाले भेदभाव को देखा होगा। जिससे परदादी बहुत दुखी हुई होंगी।  इसीलिए उन्होंने पहली संतान लड़की होने की कामना की होगी। वह समाज को प्रेरित करना चाहती होंगी। वे लड़कियों को समाज में सम्मान दिलाना चाहती होंगी। उन्होंने सोचा होगा कि अगर लड़कियों को सम्मान मिलेगा तो वह निडर होकर आगे बढ़ेगी। अगर लडकियाँ आगे बढेंगी तो हमारा समाज और देश भी आगे बढ़ेगा।


प्रश्न-5. डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है – पाठ के आधार पर तर्क-सहित उत्तर दीजिए ।

उत्तर- इस पाठ से ये बात तो शीशे की तरह साफ है कि मनुष्य अपने दृढ विश्वास और सरल व्यवहार से किसी को भी सही रास्ते पर ला सकता है। डराकर, उपदेश देकर अथवा दबाव डालकर सही  रास्ते पर नहीं लाया जा सकता है। जिसका एक उदाहरण लेखिका की माँ है। एक बार माँ जी के घर में चोर आ जाता है। माँ उसे पकड़ लेती है लेकिन वह उसे पिटवाती नहीं है। बल्कि वह उस चोर को अपना पुत्र बनाकर इतना कहती है कि अब तुम्हारी मर्जी – चाहे चोरी करो या खेती। उसके इस सरल व्यवहार से चोर का हृदय बदल जाता है और वह चोरी छोड़कर खेती करने लगता है।


पाठ-मेरे संग की औरतें (Mere Sang Ki Auraten)-मृदुला गर्ग


प्रश्न-6.‘शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है’- इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- शिक्षा प्राप्त करना बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है। लेखिका कर्नाटक के एक छोटे–से कस्बे में रहती थी। उनके दो बच्चे थे। जब वे पढ़ने के लायक हुए तो उन्होंने देखा कि वहाँ पर शिक्षा की कोई ठीक व्यवस्था नहीं है। इसके लिए उन्होंने वहाँ के कैथोलिक चर्च के फादर से एक स्कूल खोलने की बात कही। लेकिन उन्होंने ईसाई बच्चों की संख्या कम होने के कारण स्कूल खोलने से मना कर दिया। तब लेखिका ने कुछ उत्साही लोगों की मदद से एक अच्छा प्राइमरी स्कूल खुलवाया। उसमें लेखिका तथा अन्य अफसरों के भी बच्चे पढ़े। जिसमें अंग्रेजी, कन्नड़ और हिंदी तीन  भाषाएँ पढ़ाई जाएँगी। उस विद्यालय में लेखिका और अन्य लोगों के बच्चे पढ़े । बाद में उन बच्चों ने बड़े – बड़े स्कूलों में  प्रवेश लिया।


प्रश्न-7. पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है ? 
 उत्तर- ‘मेरे संग की औरतें’ पाठ के आधार पर कह सकते हैं कि निम्नलिखित गुणों वाले इंसानों को अधिक श्रृद्धा भाव से देखा जाता है-

1-जो कभी झूठ नहीं बोलता है ।

2-किसी की बात को इधर से उधर नहीं करता है।

3- जो देश की भलाई के लिए काम करते हैं।

4- जो लड़का – लड़की में भेद नहीं करता है।

5- जो गलत रास्ते पर चलने वालों को सही रास्ते पर ले आते हैं।

6-  जो उपदेश नहीं देते बल्कि करके दिखाते हैं।

7- सच्चे लोगों को श्रृद्धा भाव से देखा जाता है।

8- जिनका स्वभाव सरल और पारदर्शी होता है।

9- जो अंग्रेजों के भक्त नहीं होते हैं।

10- जो निडर और साहसी होते हैं।

उक्त पाठ में लेखिका की नानी, परदादी और माँ में ये सभी विशेषताएँ हैं। अत: ये सभी श्रद्धा

की पात्र हैं।


प्रश्न 8. ‘सच, अकेलेपन का मज़ा ही कुछ और है’-इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

उत्तर– लेखिका और उसकी बहिन को एकांत स्वभाव पसंद है। दोनों ही जिद्दी स्वभाव की हैं। इसीलिए लेखिका ने स्त्रियों को प्रेरित करते हुए बिहार की विवाहित महिलाओं को दूसरे पुरुषों के साथ नाटक में काम करने के लिए तैयार कर लिया। इसी तरह उन्होंने कर्नाटक के एक छोटे से कस्बे में प्राइमरी स्कूल खुलवाया।

वहीं दूसरी ओर लेखिका की बहिन अपने मन की मालिक है। वह स्कूल से आते समय गाड़ी से आना पसंद नहीं करती है। वह पैदल ही घर आती थी। भीषण बरसात के समय वह घर के लोगों की बात न मानकर अकेले ही जाती है।

इस तरह लेखिका और उसकी बहिन स्वतंत्र विचारों वाली हैं। वे इन्हीं व्यक्तित्व के कारण अपने कामों में हमेशा सफल रहीं।

 धन्यवाद!


डॉ. अजीत भारती

पाठ-मेरे संग की औरतें (Mere Sang Ki Auraten)-मृदुला गर्ग

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