Lakhanvi andaaz summary

Lakhanvi andaaz summary? Lakhanvi andaaz summary? इस पाठ को आप सार के माध्यम से आसानी में समझ सकते हो।

NCERT CBSE Class 10 विषय-हिंदी-अ क्षितिज-2 गद्यखंड

पाठ-लखनवी अंदाज-लेखक यशपाल

पाठ का सार


पार्ट-1

    लखनवी अंदाज़ एक व्यंगात्मक कहानी है। इसकी कहानी कुछ इस प्रकार है- ट्रेन चलने को तैयार थी। लेखक को कहीं दूर जाना नहीं था। इसलिए भीड़ से बचने और एकांत में बैठना चाहते थे। जिससे नई कहानी के बारे में सोच सकें । और  ट्रेन की खिड़की से बाहर के प्राकृतिक दृश्यों को भी देख सकें । इसिलए  लोकल ट्रेन के सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया था ।


पार्ट-2

      गाड़ी छूट रही थी। इसीलिए लेखक  सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर थोडा दौड़कर चढ़ गए। जिस डिब्बे को वो खाली समझकर चढ़े थे।  वहाँ पहले से ही एक लखनवी नवाब(सफ़ेद पोश) बहुत आराम से पालथी मारकर बैठे हुए थे। उनके सामने तौलिए पर दो ताजे खीरे रखे थे। लेखक के आने से उनको अच्छा नहीं लगा था। उनको देख नवाब साहब बिल्कुल भी खुश नहीं हुए क्योंकि उन्हें अपना एकांत भंग होता हुआ दिखाई दिया। उन्होंने लेखक से बात करने में भी कोई रूचि नहीं दिखाई। लेखक जाकर उनके सामने वाली सीट पर बैठ जाता है।

पार्ट-3

      लेखक का खाली बैठकर कल्पना करने की पुरानी आदत थी। इसलिए वो अपने आने से नवाब साहब को होने वाली असुविधा का अनुमान लगाने लगे। वे सोच रहे थे शायद नवाब साहब ने अकेले आराम से यात्रा करने की इच्छा से सेकंड क्लास का टिकट ले लिया होगा ।

Lakhanvi andaaz summary? पार्ट-4

      नवाब साहब को यह अच्छा नहीं लग रहा था कि कोई व्यक्ति उन्हें सेकंड क्लास में सफर करते देखे। उन्होंने अकेले सफर में समय काटने के लिए दो खीरे ख़रीदे होंगे। लेकिन अब किसी अंजान  व्यक्ति के सामने खीरा कैसे खाएँ ?      नवाब साहब ने गाड़ी की खिड़की से बाहर गौर से देखा।  और लेखक कनखियों (तिरछी नजरों से) से नवाब साहब की ओर देख रहे थे।

पार्ट-5

      फिर अचानक नवाब साहब ने लेखक से खीरा खाने के लिए पूछा। लेकिन लेखक ने नवाब साहब को शुक्रिया कहकर मना कर दिया। उसके बाद नवाब साहब ने दोनों खीरों को लिया और सीट के नीचे लोटा निकाला। और खिड़की के बाहर धोकर तौलिए से पोंछ लिया। जेब से चाकू निकालकर उनके सिर काट लेते हैं। फिर छील उनकी फाकें बनाकर तौलिए पर सजा लेते हैं। उसके बाद उनपर पिसा जीरा और लाल मिर्च मिला नमक डालते हैं। नमक पड़ते ही खीरों से पानी निकलने लगता है।

पार्ट-6

     उसके बाद नवाब साहब एक बार लेखक से फिर खीरा खाने के लिए पूछते हैं। चूँकि वे पहले ही इनकार कर चुके थे। इसीलिए उन्होंने अपना आत्म सम्मान बचाने के लिए इस बार पेट खराब कहकर खीरा खाने से मना कर दिया। वैसे लेखक का खीरा खाने को मन तो कर रहा था।      उसके बाद नवाब साहब ने खीरे के टुकड़ों को देखा। फिर खिड़की के बाहर देख कर एक गहरी सांस ली। और उन्होंने खीरे की फाँकों (टुकड़े) को बारी -बारी से उठाकर होठों तक लाकर सूंघा। स्वाद के आनंद में नवाब साहब की पलकें मुंद गईं। उसके बाद नवाब साहब ने खीरे के उन टुकड़े को खिड़की से बाहर फेंक दिया।

Lakhanvi andaaz summary? पार्ट-7

     खीरे के सारे टुकड़ों को सूँघकर बाहर फेंकदिया । उसके  बाद उन्होंने आराम से तौलिए से हाथ और होंठों को पोछा।  बाद में  बड़े गर्व से लेखक की ओर गुलाबी आँखों से देखते हैं। और ऐसा लगता है जैसे लेखक से कहना चाह रहे हों-यह है खानदानी रईसों का तरीका!    नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थक कर लेट जाते हैं। लेखक गौर कर रहे थे कि क्या ‘सिर्फ खीरे को सूंघकर ही पेट भरा जा सकता है?’ तभी नवाब साहब एक ऊँची डकार लेते हैं और लेखक से कहते हैं- खीरा लजीज होता है लेकिन पेट पर बोझ डाल देता है।

पार्ट-8

    यह सुनकर लेखक के ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं। उन्होंने सोचा कि जब खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से ही पेट भर कर डकार आ सकती है, तो बिना विचार, घटना और पात्रों के, लेखक की इच्छा मात्र से ‘नई कहानी क्यों नहीं बन सकती अर्थात् लिखी जा सकती है?

नोट- कहानी के माध्यम से लेखक यह कहना चाहते हैं- कि खीरा को बिना खाए पेट नहीं भर सकता है। ठीक उसी बगैर विचार, घटना और पात्र के कहानी नहीं लिखी जा सकती है। लेखक ने उन नए लेखकों पर व्यंग्य किया है जो बिना विचार, घटना और पत्रों के कहानी लिख देते हैं। और अपने आप को लेखक घोषित कर देते हैं। ऐसे लोग सिर्फ नवाब की तरह दिखावा करने का प्रयास करते हैं।


धन्यवाद! Lakhanvi andaaz summary?  अजीत भारती 

By hindi Bharti

Dr.Ajeet Bhartee M.A.hindi M.phile (hindi) P.hd.(hindi) CTET

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