Balgobin bhagat Summary

Balgobin bhagat Summary

Balgobin bhagat Summary

Balgobin bhagat Summary?

NCERT CBSE कक्षा-10 विषय-हिंदी-अ क्षितिज-2 गद्यखंड

पाठ-बालगोबिन भगत- लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी

पाठ का सार


पार्ट-1


पाठ बालगोबिन भगत रेखाचित्र है। जिस प्रकार कहानी, नाटक, उपन्यास हिंदी की विधाएँ हैं वैसे ही रेखाचित्र भी एक विधा है।

आओ तो सबसे पहले हम ये समझ लेते हैं कि रेखाचित्र किसे कहते हैं? रेखाचित्र- जब हम किसी घटना, व्यक्ति या वस्तु का शब्दों के माध्यम से ऐसा कलात्मक वर्णन करते हैं कि आँखों के सामने चित्र – सा उपस्थित हो जाता है, तो उसे रेखाचित्र कहते हैं।


पार्ट-2


   इस पाठ की कहानी कुछ इस प्रकार है कि बालगोबिन भगत एक कबीरपंथी गृहस्थ साधु हैं। उनकी उम्र साठ से ऊपर रही होगी। बाल पक गए हैं। वे कबीर पंथी टोपी और लंगोटी पहने रहते हैं। साथ में एक काला कंबल में लिए रहते हैं। रामनामी चन्दन और गले में तुलसी की माला पहनते हैं। उनके घर में एक बेटा और बहू है। बेटा अक्सर बीमार रहता है। वे खेती करने वाले गृहस्थ संन्यासी हैं। झूठ और छल से हमेशा दूर रहते हैं। साफ-साफ बात करने में विश्वास रखते हैं। कबीर को अपना आदर्श मानते हैं, हमेशा उन्हीं के गीतों को गाते हैं।


पार्ट-3


      उनके खेतों में जो भी अनाज पैदा होता है उसे सबसे पहले वे कबीर पंथी मठ में ले जाकर दे देते हैं और प्रसाद के रूप जो मिलता है उसी से अपने घर का खर्च चलाते हैं। उनका गीत सुनने के लिए गाँव वाले इकट्ठे हो जाते थे।धान के रोपाई के समय में उनके गीत सुनकर खेतों में काम करने वाले स्त्री-पुरुष और बच्चे भी झूम उठाते थे। कार्तिक, भादों, सर्दी – गर्मी हर मौसम में बाल गोबिन सभी को अपने गीत से सभी का मन मोह लेते थे।


पार्ट-4


     बालगोबिन भगत आदमी थे। उनकी भक्ति साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखने को मिला, जिस दिन उनका इकलौता पुत्र मरा था। वे रोने और दुःख के बदले उत्सव मनाने को कहते हैं। उनका मानना था कि आत्मा – परमात्मा को मिल गयी है। विरहणी अपनी प्रेमी से जा मिली है। वे आगे एक समाज सुधारक के रूप में सामने आते हैं। अपनी पतोहू द्वारा अपने बेटे को आग दिलाते हैं। सभी काम होने के बाद वे  बहू के भाई को बुलाकर उसकी दूसरी शादी करने को कहते हैं। बहू मना कर देती है भगत जी कहते हैं अगर तू नहीं जाएगी तो मैं घर से निकल जाऊँगा। बहू मजबूर होकर अपने भाइयों के साथ चली जाती है। इस प्रकार वे विधवा विवाह का समर्थन करते  हैं।


पार्ट-5


     बालगोबिन की मौत उन्हीं के अनुसार हुई। वे प्रतिदिन गंगा स्नान करने जाते थेलेकिन नेम ब्रत न छोड़ते थे। अंत समय में वे बीमार पड़ जाते हैं। जब भोर में उनका गीत सुनाई नहीं देता है। तब लोग जाकर देखते हैं तो बालगोबिन स्वर्ग सिधार जाते हैं।


धन्यवाद!

Balgobin bhagat Summary?

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डॉ. अजीत भारती

 

By hindi Bharti

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