लखनवी अंदाज प्रश्न उत्तर

लखनवी अंदाज प्रश्न उत्तर ? इस पाठ में एक नवाब साहब हैं जो कि खीरे को छीलकर उसकी  फाँकें बनाकर उस पर जीरा मिला लला मिर्च वाला नमक डालकर उसे सूंघते हैं । उसके बाद उन खीरों को नाँक से सूँघकर खिड़की से बाहर फेक देते हैं । और लेटकर डकार ऐसे लेते हैं कि जैसे उनका पेट सूँघने से भर गया हो । उन्हीं नवाब साहब को देखकर लेखक सोचता है कि खीर खाए बिना अगर पेट भर सकता है तो बिना घटना और पात्र  के कहानी लिखी जा सकती है । जो कि लेखक के अनुसार तो संभव नहीं है ।

 

लखनवी-अंदाज-प्रश्न-उत्तर

 

 


पाठ-लखनवी अंदाज-यशपाल


प्रश्न-अभ्यास /प्रश्न -उत्तर

प्रश्न-1. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं ?

उत्तरलेखक के अचानक डिब्बे में आ जाने से नवाब की आँखों में एकांत चिंतन में बाधा का असंतोष दिखाई दिया।  नवाब साहब ने मित्रता के लिए उत्साह नहीं दिखाया । इन्हीं हाव – भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं । तो लेखक ने भी उनके सामने वाली सीट पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं ।


लखनवी-अंदाज-प्रश्न-उत्तर                                                                                             

लखनवी अंदाज class-10


प्रश्न-2.नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक – मिर्च बुरका, अंतत: सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा ? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है?

उत्तर नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक – मिर्च बुरका, अंततः सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया। ऐसा उन्होंने इसलिए किया जिससे लेखक को लगे कि खीरे को खाकर पेट भरना आप जैसे साधारण लोगों का काम है । हम जैसे नवाब खीरे को सूँघकर ही तृप्त हो जाते हैं । उनका ऐसा करना अमीरी के दिखावे और खोखलेपन की ओर इंगित (संकेत) करता है ।


प्रश्न-3.बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?

 
उत्तर लेखक ने इस कथन के द्वारा नई कहानी के समय के लेखकों पर व्यंग्य किया है। किसी भी कहानी को लिखने के लिए कथावस्तु, घटना, पात्र आदि तत्वों की आवश्यकता पड़ती है। जहाँ घटना और कथावस्तु कहानी को आगे बढ़ाते हैं वहीँ पात्रों द्वारा संवाद बोले जाते हैं। इनके बिना कहानी नहीं लिखी जा सकती है ।

                                                                                                                   


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प्रश्न-4. आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?


उत्तर मैं इस निबंध को निम्न नाम देना चाहूँगा-

1-सामंतवादी

2-अमीरों की नवाबी

3-अमीरों का दिखावा

4- झूठी शान

5-खोखली संस्कृति आदि नाम भी दिए जा सकते हैं ।                                                                   


12: यशपाल: लखनवी अंदाज  


रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न-5. नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए। 


उत्तर लेखक टिकट लेकर सेकंड क्लास के डिब्बे में बैठ जाता है। उसी डिब्बे के एकांत में एक नवाब साहब भी बैठे हुए हैं। वह तौलिया बिछाकर सीट के नीचे से दो ताजे खीरे निकालकर रखते हैं। फिर उन खीरों को खिड़की से बाहर निकालकर लोटे के पानी से धोने के बाद तौलिये से सुखा लेते हैं। उसके बाद जेब से चाकू निकालकर खीरों को  छीलकर उनकीं फाँके बनाकर तौलिये पर सजाकर रख लेते हैं। उसके बाद जीरा मिला नमक और मिर्च डालते हैं। फिर एक – एक करके उन फाँकों सूँघकर खिड़की के बाहर फेक देते हैं। 


   (लखनवी-अंदाज-प्रश्न-उत्तर) 


 भाषा अध्ययन 

 प्रश्न-8.निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए –

(क)एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।
उत्तर-(क) बैठे थे − अकर्मक  क्रिया

(ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
 उत्तर-(ख) दिखाया − सकर्मक क्रिया

(ग) ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
उत्तर-(ग) आदत है − सकर्मक क्रिया

(घ) अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।
 उत्तर- (घ) खरीदे होंगे − सकर्मक क्रिया

(ङ) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला।
उत्तर- (ङ) निकाला − सकर्मक क्रिया

(च) नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँकों की ओर देखा। 
उत्तर-(च) देखा − सकर्मक क्रिया

(छ) नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए। 
 उत्तर-(छ) लेट गए − अकर्मक क्रिया

(ज) जेब से चाकू निकाला।   

उत्तर-(ज) निकाला − सकर्मक क्रिया


 

NCERT Solutions For Class 10 Kshitiz II Hindi Chapter 12

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ये प्रश्न -उत्तर कैसे लगे हमें कमेन्ट करके अवश्य बताएँ । धन्यवाद!

  डॉ.अजीत भारती

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